अपना शब्द लिखें और खोजने के लिए एंटर दबाएँ!

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पेंशनभोगियों के हितों को ध्यान में रखकर एक बड़ा फैसला किया है, जिससे 33.9 लाख पेंशन धारकों और 36.5 लाख कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने निर्देश जारी किए हैं कि सभी विभागों को रिटायरमेंट से चार साल पहले कर्मचारियों के सर्विस रिकॉर्ड, वेतन निर्धारण (पे-फिक्सेशन) और पेंशन विवरण की जांच जरूर करानी होगी।
गलती होने पर अधिकारियों की जेब से लिए जाएंगे पैसे
केंद्र के इस फैसले का लाभ करीब 70 लाख कर्मचारियों को मिलेगा। सराकर के इस कदम का उद्देश्य रिटायरमेंट के वक्त कर्मचारियों से अचानक होने वाली रिकवरी और कानूनी विवादों पर लगाम लगाना है। सरकार के इस फैसले का पालन सख्ती से किया जाए और गलती की कोई गुंजाइश न रहे, इसके लिए भी नियम बनाया है। अगर इस मामले में कोई गलती होती है तो संबंधित अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
नए नियमों के तहत पदोन्नति, इंक्रीमेंट या एसीपी/एमएसीपी के बाद जारी पे-फिक्सेशन आदेशों का सत्यापन अब 3 महीने या उसी वित्त वर्ष के अंत तक पूरा करना अनिवार्य होगा। कैग की रिपोर्ट (भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक) के मुताबिक वित्त वर्ष 2025 में केंद्र का कुल पेंशन खर्च 12.3% बढ़कर 3.46 लाख करोड़ रुपए कर दिया है, जिसमें रक्षा पेंशन की हिस्सेदारी 45.57% और सिविल पेंशन की 33.57% है।
पेंशन विवरण की जांच के लिए जरूरी नियम
पे एंड अकाउंट्स ऑफिस से वेरिफिकेशन सर्टिफिकेट जारी होने के बाद कर्मचारी से कोई वसूली नहीं की जा सकेगी।
सर्टिफिकेट के बाद भी पे-फिक्सेशन में गड़बड़ी मिलने पर नुकसान की भरपाई मंजूरी देने वाले अधिकारियों से होगी।
पेंशन के लिए सर्विस पीरियड का समय-समय पर ऑडिट होता रहेगा।