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मेरठ 15 अक्टूबर । जागृति विहार में आवास विकास परिषद द्वारा अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के बीच एक अन्य मामले को लेकर सवाल उठ रहे हैं। एक ओर जहां परिषद के अधिकारी मकानों और दुकानों पर सील लगाने की कार्रवाई कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जागृति विहार में डिप्टी रजिस्ट्रार, चिट फंड कार्यालय के निकट चौराहे से सटे एक बड़े भूखंड पर कथित रूप से प्लॉटिंग कर बिक्री किए जाने की चर्चा है।
मौखिक जानकारी के अनुसार, करीब 50 से 60 बीघा क्षेत्रफल वाले इस भूखंड पर छोटे-छोटे प्लॉट काटकर बेचे जाने की बात सामने आ रही है। आरोप है कि कॉलोनी विकसित करने के दौरान शासन के निर्धारित निर्माण एवं विकास संबंधी नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
नक्शा पास होने का दावा, लेकिन स्थिति स्पष्ट नहीं
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि प्लॉट खरीदने के इच्छुक लोगों को बताया जा रहा है कि कॉलोनी का नक्शा पास कराने के लिए आवेदन किया जा चुका है और जल्द ही स्वीकृति मिल जाएगी। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि मानचित्र अभी स्वीकृत नहीं हुआ है तो नक्शा पास होने हेतु डाला गया है वो भी मौके पर बाहर प्रस्तुत नहीं किया गया है , तो क्या संबंधित भूखंड पर प्लॉटिंग और बिक्री के लिए सभी आवश्यक अनुमतियां प्राप्त हैं? क्या मौके पर स्वीकृत मानचित्र उपलब्ध है, जिसे संभावित खरीदारों को दिखाया जा सके?
जानकारो के मुताबिक, यहां प्लॉटों की कीमत करीब एक लाख रुपये प्रति वर्ग गज तक बताई जा रही है। ऐसे में बड़ी रकम खर्च कर जमीन खरीदने वाले लोगों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि भूखंड का भू-उपयोग, कॉलोनी का लेआउट और संबंधित विभागों की स्वीकृतियां नियमानुसार हैं या नहीं।
अधिकारियों की भूमिका पर उठ रहे सवाल
इस मामले में यह भी चर्चा है कि संबंधित विभागों के अधिकारियों को कथित प्लॉटिंग की जानकारी है। यदि ऐसा है, तो अब तक इस संबंध में क्या जांच की गई है और क्या कोई कार्रवाई हुई है? यह स्पष्ट होना आवश्यक है। हालांकि, संबंधित अधिकारियों की जानकारी या किसी प्रकार की मिलीभगत के संबंध में फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
एक ओर आवास विकास परिषद द्वारा सेंट्रल मार्केट सहित अन्य क्षेत्रों में दुकानों और मकानों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, वहीं दूसरी ओर जागृति विहार में कथित रूप से विकसित की जा रही इस अवेध कॉलोनी को लेकर उठ रहे सवालों पर भी विभाग का रुख सामने आना चाहिए।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इस भूखंड के स्वीकृत मानचित्र, भूमि के उपयोग और प्लॉटिंग की वैधता की जांच कर क्या स्थिति स्पष्ट करते हैं। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि प्लॉट खरीदने वाले लोगों को भविष्य में आर्थिक और कानूनी परेशानियों का सामना न करना पड़े।
इस मामले में संबंधित विभागों और बिल्डर का पक्ष सामने आने के बाद समाचार को और विस्तृत किया जाएगा।