मेरठ 12 मई (प्र)। शहर में लगने वाले जाम के समाधान के लिए रोडवेज के भैंसाली बस अड्डे को शहर से बाहर स्थानांतरित करने के लिए दो स्थानों पर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी करने के बाद अब भूमि मालिकों को मुआवजा राशि का भुगतान किया जाना है। मंडलायुक्त से अनुमति मिलने के बाद मुख्य कोषाधिकारी भी पत्रावली का परीक्षण कर चुके । जांच-पड़ताल के बाद अब जिला प्रशासन ने मुआवजा भुगतान के लिए एनसीआरटीसी से 100 करोड़ रुपये मांगे हैं। संभवतः एक सप्ताह में धनराशि मिलते ही भूमि मालिकों को भुगतान शुरू कर दिया जाएगा भुगतान के बाद जमीन पर कब्जा लेकर इसे एनसीआरटीसी को सौंपा जाएगा।
मेरठ मेट्रो और नमो भारत ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए भैंसाली बस अड्डा और वर्कशाप की जमीन एनसीआरटीसी को सौंपी गई है। इसके बदले में भूडबराल और मोदीपुरम में बस अड्डों के निर्माण की जिम्मेदारी एनसीआरटीसी के पास है। जिला प्रशासन ने भूमि मालिकों को दिए जाने वाले मुआवजा के अवार्ड तैयार कर रखे हैं। लगभग 100 करोड़ रुपये भुगतान जमीन मालिकों को किया जाना है। भूडबराल बस अड्डे के लिए केवल भूडबराल गांव की और मोदीपुरम बस अड्डे के लिए सिवाया, दुल्हेड़ा और पल्हेड़ा गांवों के कुल 79 भूमि मालिकों की कुल 39,930 वर्ग मीटर जमीन खरीदी जा रही है।
जिलाधिकारी डा. बीके सिंह का कहना है कि बस अड्डों की जमीन के मुआवजा भुगतान के लिए एनसीआरटीसी से 100 करोड़ रुपये मांगे हैं, ताकि भुगतान करके जमीन पर कब्जा लिया जा सके। एनसीआरटीसी भी जल्द से जल्द बस अड्डों का निर्माण कराने के प्रयास में है। उसने निर्माण के टेंडर भी जारी कर दिए हैं।
भैंसाली बस अड्डे को बाहर करने के लिए इसके बदले में दो स्थानों पर बस टर्मिनल व बस डिपो बनेंगे। इसके साथ ही बागपत रोड, बड़ौत रोड व सरधना रोड पर बस शेल्टर बनाए जाएंगे। ये सभी काम एक साल में पूरे किए जाएंगे। इसके लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) ने निविंदा आमंत्रित की है। प्री-बिड मीटिंग के बाद कंपनियां टैंडर अपलोड करेंगी। 10 जून को बिड खोली जाएगी।
नमो भारत के मेरठ साउथ स्टेशन के पास बस टर्मिनल व बस डिपो बनेगा। मोदीपुरम स्टेशन के पास बस टर्मिनल बनेगा लेकिन इसका बस डिपो पल्हेड़ा में बनेगा। यहां इलेक्ट्रिक बसों को चार्ज करने के लिए विशेष सुविधा रहेगी। इन बसों का नियमित सँचालन शुरू होने पर कई मार्गों पर बसों की संख्या बढ़ेगी। इसे देखते हुए सरधना रोड, बागपत रोड, बड़ौत रोड पर बस शेल्टर बनाए जाएंगे। इन तीनों शेल्टर को भी इसी टैंडर प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया है। भवन हस्तांतरण के बाद एक साल तक संबंधित ठेकेदार कंपनी पर ही मरम्मत आदि की जिम्मेदारी रहेगी।
बस टर्मिनल व बस डिपो में अंतर
बस टर्मिनल में यात्रियों लाने-ले जाने के लिए बसें आती-जाती हैं। यहां टिकट काउंटर, प्रतीक्षालय, पूछताछ केंद्र होते हैं। वहीं बस डिपो में बसों की पार्किंग, रात में खड़ी करने, सफाई और छोटी-बड़ी मरम्मत के लिए वर्कशॉप, वाशिंग वे, ईंधन पंप, स्पेयर पार्ट्स स्टोर आदि होते हैं।

