भगवान ने जो सुनिश्चित किया है हम कितना ही प्रयास कर ले वो अटल है इसलिए यह सोचकर कि कल क्या होगा डरकर जीने की बजाय बिना डर के जिएं और जो बाकी लोग तनाव में आ जाते हैं वो बचे रह सकते हैं। पाठकों कई बार देखा कुछ लोग
एक बार एक युवक ने बताया कि सामने से जो गुंडा आ रहा है मुझे डर है वह मुझे मारेगा। घर से वाहन लेकर निकले लोग यह सोचने लगते हैं एक्सीडेंट ना हो जाए ऐसे कई मामले देखने को मिलते हैं जिनहें पूर्व में ही डर मानकर हम अपनी सेहत खराब कर लेते है। अगर निर्भिकता से किसी का सामना किया जाए परिवार में कोई फैसला लेना हो या परीक्षा में सोच बदलती है वो हमारे भविष्य को अंधकारमय कर देती है। मेरा मानना है कि सामने से आ रहा गुडा हम पर हमला कर सकता है तो हमें बिना डरे उसके सामने जाना चाहिए दो चार बार मारपीट करेगा बाद में शांत हो जाएगा कि यह मुझसे डरता है। जब मैं चार पांच साल की उम्र में चाय की दुकान पर झूठे बर्तन धोता था तो एक बाबा ने किसी से कहा कि तेरा बेटा पेड़ से कूदकर मर जाएगा तो परिवार के लोगों ने उसे कमरे में बंद कर दिया। बाद में वह किसी तरह कमरे से बाहर निकला और पेड़ पर चढ़ा और गिरकर मर गया। इससे पता चलता है कि जो समय मिला वो अपने बच्चों के साथ रहकर यादगार बना सकते थे और हो सकता है कि यह घटना ना होती। कहने का मतलब है कि डरकर आप ना किसी परीक्षा से बच सकते हैं ना किसी देनदारी से। १९८२ में अनपढ़ होने के बावजूद पत्रकारिता में आया तो इसके बारे में मुझे कुछ नहीं पता था। दो माह बाद नाम लाया और 22 अक्टॅूबर १९८२ को समाचार पत्र निकाला। मेरे मित्रों ने समझाया कि ना तुम्हारे पास अक्षर ज्ञान है ना पैसा तो यह काम कैसे करोगे। कई ने कहा कि इसके पास कुछ नहीं है हमारी पुंजी और बर्बाद करेगा सबकी सुनी लेकिन हौंसला कम नहीं हुआ। आज में अपने पाठकों सहयोगियों की मदद से इस क्षेत्र में अपनी व्यवस्था बनाए हुए हूं और यह सब मेरा प्रयास नहीं है यह जो मेरे अपने हर क्षेत्र में है उनही के उत्पन्न हौंसले से मैं आगे बढ़ रहा हूं। इन बातों का यह मतलब नहीं है कि मैं किसी ्रअहम से ग्रस्त हूं। हमें कठिनाईयों के डर से अपना मार्ग बदलने की आवश्ययकता नहीं है। ऐसा करने से हम लडने से पहले ही धराशायी हो जाते है। कई बार लगता है कि हमारा खेल खत्म हो रहा है लेकिन भगवान और अपने साथ होते हैं इसलिए हम आगे बढते है। जब मैं मजदूरी करता था तीन चारगुंडो ने मेरी पिटाई की। एक बार सोचा कि यह रास्ता बदल दूं लेकिन फिर सोचा कि थोडी मारपीट से मैं कमजोर नहीं होने वाला। मैं रोजाना उनके सामने से निकलने लगा। कहने का मतलब है कि जीवन जीतना है पूरे हौंसले और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ते रहो तरक्की का मार्ग कोई नहीं रोक सकता। इसलिए किसी से डरो मत। कठिनाई आती है चली जाती है ।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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