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    Home»देश»पुरातन छात्र सम्मेलन में बड़े लोगों का ही महिमामंडन क्यों, स्थानीयों को भी दिया जाना चाहिए सम्मान
    देश

    पुरातन छात्र सम्मेलन में बड़े लोगों का ही महिमामंडन क्यों, स्थानीयों को भी दिया जाना चाहिए सम्मान

    adminBy adminFebruary 16, 2026No Comments5 Views
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    जैसे जैसे समाज में जागृति आ रही है और शिक्षित होकर युवा उच्च पदों पर आसीन होने के साथ बहुराष्ट्रीय कंपनियों में मोटी तनख्वाह प्राप्त कर रहे हैं तब से धीरे धीरे समाज में उन्हें सम्मान देने की व्यवस्था शुरु हुई। इसमें कोई बुराई भी नहीं है। जब एक जगह कुछ होता है तो फिर वो हर क्षेत्र में पैर पसारने लगता है। ऐसा ही पिछले कुछ दशक से देशभर के छोटे बड़े स्कूलों में शिक्षा प्राप्त कर आगे पढ़ने वालों के आपसी मिलन और मोहब्बत की डोर मजबूत करने के लिए कॉलेजों में पुरातन छात्र मिलन एल्युमिनाई मीट होने लगी है। अब तो दिन प्रतिदिन ऐसे आयोजनों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। क्योंकि स्कूलों में अच्छी फीस भी आती है और पुराने छात्र भी आर्थिक मदद करते हैं और प्रबंध कमेटियां भी अपने स्कृूल का नाम रोशन हो और अपने यहां के छात्र कॉलेज आएं इसके लिए प्रयास करती हैं। इसका एक फायदा भी होते दिखाई देता है क्योंकि कई छात्र उच्च पदों पर होते हैं वो कई तरीके से अपने पुराने स्कूल मेें पहुंचकर बचपन और जवानी को याद कर भावुक होते हैं उससे संवेदनशीलता उन्हें अपने शिक्षा के मंदिर को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करती है। ऐेसे में कई आर्थिक व अन्य मदद करने में पीछे नहीं रहते।
    मगर आयोजकों को अब इस बात पर भी ध्यान देना होगा कि जो छात्र स्थानीय स्तर पर रहते हैं और बहुत कुछ करते हैं उन्हें भी पुरातन छात्र सम्मेलनों में यह अहसास कराना जरुरी है कि उनका भी महत्व कम नहीं है। वो भी सम्मानित हैं। जो मदद करते हैं उसके लिए उनके साथ ही स्कूल आभारी है। अभी पिछले दिनों उच्च शिक्षा के मंदिर रेलवे रोड स्थित डीएन कॉलेज में हर वर्ष की भांति पुरातन छात्र सम्मेलन हुआ। जिसमें जो लोग हर सम्मेलन में आते रहे हैं उनका महिमामंडन और सम्मान किया जाता रहा लेकिन वरिष्ठ राजनेता एक समय में केंद्र सरकार की राष्ट्रीय स्तर की बीस बीस कमेटियों के सदस्य रहे चौधरी यशपाल सिंह जो कॉलेज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और छात्र नेता भी रहे और भाजपा युवा मोर्चा की कार्यकारिणी के पूर्व सदस्य आगरा हवाई अडडा प्राधिकरण सलाहकार अंकित चौधरी का ना तो संचालकों ने नाम लिया और ना ही सम्मान किया। आखिर पुरातन छात्र सम्मेलन के नाम पर बड़े लोगों का महिमामडन कब तक होता रहेगा और आयोजक अपने स्थानीय स्तर पर कार्य कर रहे छात्र साथियो को कब तक नजरअंदाज करते रहेंगे यह दो उदाहरण पूर्ण नहीं है ऐसे मामले हर पुरातन सम्मेलन में नजर आते हैं। मुझे लगता है कि मैनेजमेंट कमेटियों एल्युमिनी मीट संचालकों को ऐसी कार्यप्रणाली बनानी चाहिए जिससे जिस वर्ष का पुरातन छात्र सम्मेलन हो उसमें नामचीन के साथ ही शहर में रहने वाले छात्रों का भी सम्मान किया जाए जिससे कॉलेज का सम्मान बढ़ेगा और छात्र अपने कॉलेज की प्रगति के लिए काम करने में सहयोगी बनेंगे।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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