मेरठ। पिछले काफी समय से गंदगी, जलभराव, आवारा कुत्तों और बंदरों से परेशान ग्रामीणों का सोमवार को सब्र का बांध टूट गया। सैकड़ों ग्रामीण कमिश्नरी कार्यालय पर पहुंचे गए और प्रदर्शन करने लगे। कई ग्रामीण ट्रैक्टर लेकर भी पहुंचे थे। इस दौरान उनकी पुलिस से धक्का-मुक्की और एडीएम सिटी के साथ नोकझोंक भी हुई।
पार्षद ने बताया कि वार्ड में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो चुकी है, जिससे बीमारी और महामारी फैलने का डर है। वार्ड का क्षेत्रफल 20-25 वर्ग किमी है, लेकिन आधे से अधिक सफाई कर्मचारी दिल्ली रोड पर तैनात हैं।
गलियों में कूड़े के ढेर लगे हैं और नालियां पूरी तरह बंद हैं। कचरा कलेक्शन की समस्या भी गंभीर है। नगर निगम द्वारा संचालित बीवीजी कंपनी की दो गाड़ी डोर-टू-डोर कूड़े का कलेक्शन पूरे वार्ड में करती है, लेकिन कई मोहल्ले ऐसे है, जहां पर दो-दो सप्ताह तक गाड़ी नहीं जाती है।
कुंडा, पुट्ठा, डूंगरवाली के ग्रामीण राकेश कुमार, विश्वजीत सिंह, मनोज कुमार, सोनू, विश्वास आदि ने बताया कि उनके गांव में जलभराव रहता है। बरसात के बाद स्थिति और भी खराब हो गई है। गांव में सफाई कर्मचारी नहीं है। जिस कारण ग्रामीण बीमार पड़ रहे हैं। सभी समस्याओं के समाधान का आश्वासन लेकर ग्रामीण वापस लौटे।
‘नरक निगम बन चुका नगर निगम’
इस दौरान एडीएम सिटी बृजेश कुमार ने अपर नगर आयुक्त को बुलाया। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान कर दिया जाएगा। तभी अचानक से एक ग्रामीण कुशलपाल अपर नगर आयुक्त से कहा कि उनका नगर निगम अब नरक निगम बन चुका है।
एडीएम सिटी ग्रामीणों पर भड़के
कमिश्नरी कार्यालय पर धरने पर बैठे ग्रामीणों को एडीएम सिटी बृजेश सिंह ने समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण नहीं माने। तभी वह पार्षद प्रशांत कसाना पर भड़क गए और जबरन उठाने लगे। यह देखते ही ग्रामीण भी भड़क गए और वह भी हंगामा करने लगे। काफी देर तक एडीएम के साथ ग्रामीणों की नोकझोंक हुई। बाद में पुलिस ने हस्तक्षेप कराया। एडीएम सिटी बृजेश सिंह ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि वह जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान कराएंगे। जिसके बाद ग्रामीण माने और लौट गए।
इन मोहल्लों में बंदरों का अधिक आतंक
सुंदरा व इंद्रावती मोहल्लों में बंदरों का सबसे अधिक आतंक है। पार्षद प्रशांत कसाना ने बताया कि वह कई बार नगर निगम और जिला प्रशासन को शिकायत दे चुके हैं, लेकिन उनकी नहीं सुनी जा रही। इसी कारण वह मजबूरी में कमिश्नरी कार्यालय पर आए। बाद में लिखित में कमिश्नरी के नाम ज्ञापन दिया। Src- Jagran

