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    Home»देश»वट सावित्री व्रत : बरगद की कोपल निगलने की क्या है परंपरा?
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    वट सावित्री व्रत : बरगद की कोपल निगलने की क्या है परंपरा?

    adminBy adminMay 15, 2026No Comments3 Views
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    नई दिल्ल, 15 मई (ता)। हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण व्रतों में से एक माना जाता है। ज्येष्ठ अमावस्या के दिन मनाए जाने वाले इस पर्व पर महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए बरगद के वृक्ष की पूजा करती हैं। इस पूजा की कई परंपराएं निभाई जाती हैं, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण परंपरा है बरगद की कोपल को निगलना। आइए इसके पीछे छिपी धार्मिक वजह को जानते हैं।
    पौराणिक कथाओं के मुताबिक, जब माता सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण वापस पाए थे, तब उन्होंने वट वृक्ष के नीचे ही अपनी पूजा पूरी की थी। ऐसा कहा जाता है कि सत्यवान को फिर से जीवन मिलने की खुशी में सावित्री ने बरगद की कोपल और भीगे चने से अपना उपवास खोला था।
    तभी से यह परंपरा चली आ रही है कि सुहागिनें पूजा के बाद बरगद की दो कोपल और दो भीगे चने को बिना चबाए पानी के साथ निगलती हैं। कहते हैं कि ऐसा करने से पति को लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद मिलता है।
    बरगद के वृक्ष को अक्षय माना जाता है, जिसका कभी अंत नहीं होता। वैसे ही बरगद की कोपल (नई कली) को निगलना वंश वृद्धि की कामना से जुड़ा है। माना जाता है कि जो महिलाएं संतान सुख की कामना रखती हैं, उन्हें यह परंपरा पूरी श्रद्धा के साथ निभानी चाहिए। इससे संतान से जुड़ी बाधाएं दूर होती हैं।
    वट सावित्री की मुख्य पूजा और सात या 108 बार परिक्रमा पूरी करने के बाद, सुहागिन महिलाएं वट वृक्ष से दो ताजी कोमल कलियां तोड़ती हैं। इसके बाद दो भीगे हुए चने के साथ इन कलियों को सीधे निगल लिया जाता है। ध्यान रहे कि परंपरा के अनुसार, इन्हें दांतों से चबाया नहीं जाता।
    अस्वीकरण: इस लेख में कहे गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। ताजा खबर यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। ताजा खबर अंधविश्वास के खिलाफ है।

    Desh New Delhi Religious tazza khabar tazza khabar in hindi Vat Savitri Vrat: What is the tradition behind swallowing the banyan tree's shoots?
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