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    Home»देश»किडनी ट्रांसप्लांट मामले में दो शातिर ओटी टेक्नीशियन गिरफ्तार
    देश

    किडनी ट्रांसप्लांट मामले में दो शातिर ओटी टेक्नीशियन गिरफ्तार

    adminBy adminApril 3, 2026No Comments8 Views
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    कानपुर 03 अप्रैल। आहूजा हॉस्पिटल में हुए अवैध किडनी ट्रांसप्लांट मामले में रावतपुर पुलिस ने बृहस्पतिवार को दो शातिर ओटी टेक्नीशियन को दहलन क्रॉसिंग से गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपी गाजियाबाद और हापुड़ के रहने वाले हैं जो बड़े अस्पतालों में कार्यरत थे और इस रैकेट के लिए संसाधन जुटाने का काम करते थे। इनमें राजेश कुमार निवासी गाजियाबाद (नोएडा के सर्वोदय हॉस्पिटल में ओटी टेक्नीशियन) और कुलदीप सिंह राघव निवासी हापुड़ (गाजियाबाद के इंदिरापुरम स्थित शांति गोपाल नर्सिंगहोम में ओटी टेक्नीशियन) शामिल हैं। पुलिस ने दोनों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया है। अब पुलिस की टीमें उस यूरोलॉजी सर्जन की तलाश में जुटी हैं जो इनके साथ इस पूरी सर्जरी को लीड कर रहा था।

    फ्लाइट से आते थे, लग्जरी कार से वापस जाते थे
    जांच में सामने आया है कि यह गिरोह बेहद हाई-प्रोफाइल तरीके से काम करता था गाजियाबाद के डॉक्टर और दोनों टेक्नीशियन रविवार को दिल्ली से कानपुर की फ्लाइट लेकर पहुंचे थे। रविवार देर रात बिहार के आयुष की किडनी मुजफ्फरनगर की पारुल तोमर को लगाने के बाद आरोपी रेलबाजार से बुक की गई एक किया कैरेंस कार से गाजियाबाद के वैशाली तक गए और वहां से फरार हो गए।

    डीसीपी पश्चिम एमएम कासिम आबिदी के अनुसार घटना के बाद एक दूसरी टीम अर्टिगा कार से लखनऊ के ट्रांसपोर्टनगर गई थी। कार चालक के अनुसार इस टीम में पांच लोग सवार थे जो आपस में दमन और दीव की यात्रा और अन्य सर्जरी पर चर्चा कर रहे थे। ये सभी भी लखनऊ से फ्लाइट के जरिए दूसरे शहरों को रवाना हुए पुलिस इनके चेहरे पर मास्क और आपसी बातचीत के सुरागों से पहचान जुटा रही है।

    किडनी ट्रांसप्लांट की तैयारियों के लिए लेते थे 40 हजार रुपये
    ओटी टेक्नीशियन राजेश कुमार और कुलदीप सिंह राघव हर केस के 35 से 40 हजार रुपये लेते थे। उनकी जिम्मेदारी गुर्दा प्रत्यारोपण से पहले संसाधन मुहैया कराना और पूरी तैयारी रखना था। दोनों ओटी टेक्नीशियन हमेशा फ्लाइट से शहर आया करते थे। दवाएं, इंजेक्शन और उपकरणों को किस तरह से तैयार करना है, यह सब जिम्मेदारी दोनों की थी। दवाएं, इंजेक्शन और एंटीबायोटिक भी यही लेकर आया करते थे। पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि गुर्दा प्रत्यारोपण के बाद किडनी के मरीज और डोनर को पर्चे पर लिखे परामर्श यही दिया करते थे। इस पर्चे पर यूरोलॉजी के सर्जन का परामर्श रहता था। दोनों की जान-पहचान एनसीआर के बड़े दवा और सर्जिकल आइटम की फर्मों से मिली है।

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