आजकल देशभर में मीडिया में कांवड़ यात्रा और भगवान महादेव के जयकारों से भरी पड़ी है। कांवड़ से जल लाकर भगवान भोलेनाथ को आस्था से समर्पित करने का यह सिलसिला आदिकाल से चला आ रहा है। १९८६ से पहले तक हरिद्वार से जल लेकर आने वालों की सेवा के लिए कहीं कोई सेवा शिविर नजर नहीं होता था। मुजफ्फरनगर की धर्मशाला और खतौली नहर के मोड़ पर ग्रामीण कैंप लगाकर भोजन परोसने के साथ ही पानी और चिकित्सा की व्यवस्था होती थी। मुझे याद है कि १९८६ में छठी कांवड़ लेकर हरिद्वार से चला तो खतौली के पास प्यास लगने पर घर के बाहर खड़ी महिला से पानी मांगा को उसने कहा कि आधा किमी दूर नल है वहां पी लेना। कहने का मतलब है कि इतने कैंप नहीं लगा करते थे। १९८६-८७ के बीच हरियाणा के लोगों ने ज्वालापुर में कैंप लगाया जिसमें चाय नाश्ता खाना भक्तों को परोसा गया और नब्बे का दशक आते आते शिवभक्तों का जल लेने जाना इतना बढ़ गया कि उसके लिए अलग से प्रशासनिक व्यवस्थाएं की जाने लगी। धीरे धीरे विभिन्न प्रकार के भोजन सेवा कैंपों में परोसा जाने लगा। साथ में डॉक्टरों के कैंप भी लगने लगे तो यह भक्ति का सफर पहले के मुकाबले कठिनाईयों भरा नहीं रहा। पूर्व में कांवड़िये थाली चम्मच ढोलक लेकर चलते थे और सफर आराम से काटने के लिए भजन गाया करते थे। अब तो वाहनों पर डीजे कांवड़ियों के साथ चलते हैं और उनका ध्यान बटाते हैं और रास्तों में पड़ने वाली कॉलोनियों और गावों के लिएपरेशानी का कारणबनते हैं। पहले यह दो दिन के लिए होती थी तब कुछ जगह पुलिस लगाई जाती थी और मंदिरों के पास पुलिस प्रशासन का कैप लगने लगा। ना तो चौधरी चरण सिंह कांवड़ मार्ग था और ना परतापुर बाईपास बना था तो ज्यादातर कांवडिये शहर से निकलते थे। इनके लिए इंतजाम बढ़ने लगे फिर भी कई बार हंगामे हुए जिन्हें संभालना कठिन रहा। जब संजय अग्रवाल यहां डीएम थे तो परतापुर चौराहे पर चले हंगामे को उन्होंने जल्दी संभाल लिया।
इस यात्रा में भक्तों की संख्या को देखकर व्यवस्था की जानी चाहिए। इस साल भी पुलिस प्रशासनिक अधिकारी सीसीटीवी कैमरे लगाने के साथ ही सादी वर्दी में पुलिस को लगाया गया है और चिकित्सा के लिए वाहन चलाए जा रहे हैं। अफसर भी सेवा शिविरों का उदघाटन कर रहे हैं और कहसकते हैं कि व्यवस्था सराहनीय और सूझबूझ वाली है। लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि इस बार एक अगस्त से ही व्यवस्थाएं लागू कर दी गई जो नागरिकों के लिए परेशानी का कारण है। दूसरे जिलों में जाने वाले लोग परेशान है और कितनों की तो आधा महीने की छूटटी हो जाएगी। कट भी बंद कर दिए जाएंगे आखिर क्यों। नागरिकों की बात से मैं भी सहमत हूं कि मुरादनगर, दिल्ली हरियाणा जाने वालों के लिए कांवड़ मार्ग बनाया गया। अगर अधिकारी मेरठ व आसपास के क्षेत्रों में जानेवाले कांवड़ियों को छोड़कर खतौली की नहर से भेजे और मोदीनगर जाने वालों को परतापुर से निकाला जाए तो नागरिकों को परेशानी नहीं होगी क्योंकि आघड़नाथ मंदिर तक आनेवाले श्रद्धालु दो दिन आते हैं। अगर दो दिन रास्ते बंद किए जाएं तो कहीं कोई बवाल या परेशानी नहीं होने वाली क्योंकि पुरा महादेव जाने वाले कांवड़िये नहर से मुड़ जाते हैं। कहने का मतलब है कि अधिकारियों को कांवड़ मेला शांति से संपन्न कराने के लिए इस बात को ध्यान रखें कि नागरिक घरों में कैद ना हो इसलिए बाहरी क्षेत्रों से कांवड़ियों को निकाला जाए और शिवरात्रि से दो दिन पहले व्यवस्था कराने की आवश्यकता नागरिकों द्वारा महसूस की जा रही है। डीएम डॉ वीके सिंह पहले भी यहां तैनात रहे हैं और यहां की जानकारी रखते हैं इसलिए जब तक शहर में भीड़ ना बढ़े तब तक बिना वजह बैरिकेडिग और कॉलोनियों के गेट पर पुलिस द्वारा ना रोके जाएं और किसी के साथ दुव्यर्वहार ना करें। क्योंकि डयूटी करने के नाम पर किसी का अपमान ना करें और हर आदमी अपना काम कर रहे हैं। अपमान ना कर जरुरतों का ध्यान जरुर रखना चाहिए।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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