मेरठ 30 मई (प्र)। नौचंदी मेले में लगे झूलों को लेकर एक बार फिर तकनीकी व्यवस्था और सुरक्षा मानकों पर बहस तेज हो गई है। मेले के सर्कस प्लॉट क्षेत्र में 33 केवी की हाईटेंशन लाइन के नीचे कुल सात झूले तीन बड़े और दो छोटे मुख्य झूले, जबकि उनके आसपास दो अतिरिक्त झूले संचालित किए जा रहे हैं।
बिजली निगम के मुख्य अभियंता (शहर) रजनीकांत मिश्रा का दावा है कि यह लाइन फिलहाल बंद स्थिति में है। इसमें करंट प्रवाहित नहीं हो रहा है, इसलिए झूलों का संचालन अनुमति के जरिए जारी है। मुख्य अभियंता (शहर) के अनुसार, यह 33 केवी लाइन सामान्य रूप से चालू नहीं रहती, बल्कि इसे केवल इमरजेंसी में उपयोग किया जाता है। जब एक फीडर से दूसरे फीडर को बिजली सप्लाई देनी होती है, तभी इस लाइन में करंट प्रवाहित किया जाता है। वर्तमान में इस लाइन पर सप्लाई बंद है, इसलिए झूले इसके नीचे चल रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में इमरजेंसी स्थिति में इस लाइन में करंट प्रवाहित करने की आवश्यकता पड़ती है, तो सबसे पहले इस क्षेत्र में चल रहे सभी झूलों का संचालन रोक दिया जाएगा। उसके बाद ही लाइन को चालू किया जाएगा।
सुरक्षा शर्तों के साथ झूला संचालन जारी
मेला प्रशासन और विद्युत अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। फिलहाल, झूला संचालन को इस शर्त पर अनुमति दी गई है कि इमरजेंसी सप्लाई के दौरान तुरंत संचालन बंद कर दिया जाएगा। मेले में झूलों की व्यवस्था को लेकर यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि हाईटेंशन लाइन के नीचे संचालन को लेकर पहले आपत्तियां उठ चुकी थीं। हालांकि वर्तमान रिपोर्ट के अनुसार लाइन निष्क्रिय है और किसी भी प्रकार का करंट प्रवाहित नहीं हो रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे सिस्टम की मॉनिटरिंग की जा रही है। और यदि किसी भी स्तर पर बिजली सप्लाई की जरूरत बनती है तो सुरक्षा मानकों के तहत तुरंत झूले बंद कर दिए जाएंगे।

