मेरठ 25 मई (प्र)। सदर बाजार स्थित प्राचीन भगवान श्री जगन्नाथ स्वामी मंदिर में प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए एसीएम सदर न्यायालय के आदेश का अनुपालन कराया गया। न्यायालय द्वारा नियुक्त रिसीवर रवि प्रजापति ने थाना सदर बाजार पुलिस की मौजूदगी में मंदिर परिसर का चार्ज संभाल लिया।
इस दौरान मंदिर समिति के कमरे, रथ खाना और परिसर के दो अन्य कमरों को सील कर दिया गया। मंदिर के दानपात्र में रखी धनराशि भी रिसीवर ने अपने कब्जे में ले ली।
मामला मंदिर के प्रबंधन और कब्जे को लेकर मंदिर समिति, ट्रस्ट और पुजारी पक्ष के बीच चल रहे विवाद से जुड़ा है। पिछले करीब दो वर्षों से तीनों पक्षों के बीच तनातनी बनी हुई है। विवाद को देखते हुए एसीएम सदर न्यायालय ने 17 मार्च को धारा 146 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत मंदिर को कुर्क करने के आदेश दिए थे।
न्यायालय ने पुलिस रिपोर्ट के आधार पर माना था कि मंदिर के प्रबंधन और कब्जे को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है, जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। आदेश में तहसीलदार और थाना प्रभारी सदर बाजार को मंदिर का कब्जा लेकर न्यायालय के सुपुर्द रखने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही वास्तविक अधिकारों के निर्धारण तक मंदिर की देखरेख और प्रबंधन रिसीवर की निगरानी में रखने को कहा गया था।
सदर बाजार पुलिस की रिपोर्ट में वर्ष 2025 की भगवान जगन्नाथ रथयात्रा और बलदेव छठ आयोजन के दौरान दोनों पक्षों के बीच हुए विवाद का भी उल्लेख किया गया था। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि विवाद के चलते शांति व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।
मंदिर में हुई प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर कुछ लोगों ने सवाल भी उठाए हैं। मंदिर समिति से जुड़ी अधिवक्ता राशि शर्मा ने सोशल मीडिया पर कहा कि कुछ लोगों के विवाद का असर मंदिर की पूजा व्यवस्था, दानपात्र और धार्मिक सामग्री पर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने मंदिर को आस्था का केंद्र बताते हुए प्रशासनिक कार्रवाई पर आपत्ति जताई।
भगवान श्री जगन्नाथ स्वामी मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेंद्र वर्मा ने कहा कि मंदिर के प्रबंधन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। उनका आरोप है कि पुजारी पक्ष मंदिर पर निजी कब्जा करने का प्रयास कर रहा था। उन्होंने रिसीवर नियुक्त करने के फैसले को समाज और मंदिर हित में बताया।
वहीं, भगवान श्री जगन्नाथ मंदिर सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय गोयल ने आरोप लगाया कि पुजारी पक्ष मंदिर को निजी संपत्ति की तरह इस्तेमाल कर रहा था। उन्होंने कहा कि मंदिर को रातभर खुला रखा जाता था और वहां निजी कार्यालय संचालित किया जा रहा था।
एसडीएम सदर दीपक माधुर ने कहा कि मंदिर प्रबंधन को लेकर विवाद और तनाव की स्थिति को देखते हुए शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए न्यायालय के आदेश का अनुपालन कराया गया है।

