मुजफ्फरनगर, 16 जून (ता)। जनपद के जिला पूर्ति विभाग में कथित भ्रष्टाचार और राशन वितरण व्यवस्था में अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा है और अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप लगाए हैं।
लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के प्रदेश संगठन मंत्री अमित कुमार गौतम ने आरोप लगाया है कि सदर ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम रथेडी में तैनात राशन डीलर अनिल कुमार गर्ग के खिलाफ पहले भी मुख्यमंत्री पोर्टल और जिलाधिकारी स्तर पर शिकायतें दर्ज कराई गई थीं, लेकिन इन शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। पार्टी का कहना है कि जांच प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही बरती गई और तथ्यों को नजरअंदाज कर मामले को बंद कर दिया गया।
आरोपों के अनुसार राशन डीलर अनिल कुमार गर्ग ने स्वयं वीडियो में यह स्वीकार किया है कि उनकी दुकान में दो तौल कांटे लगे हुए हैं और दुकान के बाहर आवश्यक सूचना बोर्ड भी नहीं लगाया गया है, जो नियमों का उल्लंघन है। इसके बावजूद पूर्ति विभाग के अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने मौके पर वास्तविक निरीक्षण किए बिना और ग्रामीणों के बयान दर्ज किए बिना ही मनमानी तरीके से रिपोर्ट तैयार कर दी।
पार्टी नेताओं ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए आरोप लगाया है कि कुछ अधिकारियों ने मिलीभगत कर राशन डीलर को संरक्षण दिया, जिसके कारण सरकारी राशन वितरण प्रणाली की पारदर्शिता प्रभावित हो रही है और गरीबों के हक पर असर पड़ रहा है।
लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) ने मांग की है कि मामले की जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी, विशेष रूप से एडीएम स्तर के अधिकारी से कराई जाए ताकि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित हो सके। साथ ही पहले तैयार की गई जांच रिपोर्ट की भी पुनः समीक्षा करने की मांग उठाई गई है।
पार्टी का कहना है कि यदि समय रहते दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई तो इसका सीधा असर सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर पड़ेगा और जरूरतमंद परिवारों को राशन मिलने में और अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
इस पूरे मामले की प्रतिलिपि राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवानएवं केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण एवं उद्योग मंत्री भारत सरकार को भी भेजी गई है। वहीं इस ज्ञापन के दौरान पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिन्होंने एक स्वर में जांच की मांग का समर्थन किया। स्थानीय स्तर पर यह मामला अब चर्चा का विषय बन गया है और लोगों की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है कि क्या इस प्रकरण में वास्तव में उच्चस्तरीय जांच बैठाई जाएगी या मामला फिर से फाइलों में दबकर रह जाएगा।
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