जब सेना में अग्निवीरों के रुप में युवाओं की भर्ती शुरु हुई थी तब विपक्षी दलों द्वारा इसका खुला विरोध किया गया था तथा केंद्र सरकार को इस नीति के लिए अनेकों प्रकार के आरोपों का सामना भी करना पड़ा था लेकिन मेरा तब भी मानना था कि अग्निवीर योजना घाटे का सौदा नहीं है क्योंकि कुछ वर्ष के लिए ही सही उन्हें नौकरी की धनराशि दी जाएगी और पूरा खर्चा सेना उठाएगी। अब एक जानकारी के अनुसार इस वर्ष लगभग ५० हजार अग्निवीर कार्यमुक्त होंगे जिनके लिए इससे पहले भी कई विभागों में स्थान आरक्षित किए जा चुके हैं। अब जो घोषणा की गई है कि कार्यमुक्त अग्निवीरों को उच्च शिक्षा में भी प्राथमिकता से मौका दिया जाएगा जो इस बात का प्रतीक है कि आम के आम गुठलियों के दाम वाली कहावत के अनुसार प्रशिक्षण भी मिला देशभक्ति की भावना भी मजबूत हुई और जो धन मिलेगा वो अलग से। ऐसे में यह योजना जो लोग इससे संबंध है उनके लिए फायदे का सौदा साबित हुई है। क्योंकि इन अग्निवीरों को अनेक प्रकार के कार्य सेवा के दौरान सिखाए गए। जो अगर वो निजी तौर पर सीखता तो लाखों रुपये का खर्चा फीस रहन सहन और खाने पीने पर आता। लेकिन अब उन्हें साथ में मेहनताना भी मिलेगा। इससे संबंध एक खबर के अनुसार चार साल पूर्व शुरू हुई अग्निवीर योजना के तहत सेना में अग्निवीरों की भर्ती की गई थी जिनके पहले बैच को कार्यमुक्त करने की तैयारियां चल रही हैं।
कार्यमुक्त होने वाले अग्निवीरों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारों ने पहले ही कई घोषणाएं कर रखी हैं। लेकिन इनमें से जो अग्निवीर उच्च शिक्षा में जाना चाहेंगे, उनके लिए भी शानदार अवसर हैं। अग्निवीर के कार्यकाल के दौरान उन्होंने जो कार्य किया है, उसके बदले उन्हें क्रेडिट प्रदान किए जाएंगे, जिसके आधार पर वे आगे की पढ़ाई शुरू कर सकते हैं।
रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि तकनीकी सेवा में लगे अग्निवीरों को इससे सबसे ज्यादा फायदा होगा। मसलन, कोई अग्निवीर सेना में इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ा कार्य कर रहा है तो उसे चार साल की सेवा के दौरान नई शिक्षा नीति के प्रावधानों के अनुरूप क्रेडिट मिलेंगे। कार्यमुक्त होते समय उसके पास एक वोकेशनल सार्टिफिकेट तो होगा ही साथ में हासिल किए गए कुल क्रेडिट भी होंगे। यही अग्निवीर अब इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में शिक्षा लेना चाहता है तो वह क्रेडिट के हिसाब से सीधे दूसरे या तीसरे वर्ष में एडमिशन ले सकेगा।
इसी प्रकार यदि वह बीए, बीएससी या कोई अन्य शिक्षा लेना चाहता है तो उसके क्रेडिट्स को उसमें गिना जाएगा। इस प्रकार जो अग्निवीर कार्य मुक्त होने के बाद उच्च शिक्षा में जाकर नए सिरे से अपना करियर बनाना चाहते हैं, तो उनके लिए यह एक अच्छा मौका होगा।
करीब 50 हजार अग्निवीर कार्यमुक्त होंगे रू रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार तीनों सेनाओं के करीब 50-55 हजार अग्निवीर इस साल कार्यमुक्त होंगे। इनमें से एक चौथाई को सेनाओं में स्थाईकरण के लिए फिर से भर्ती कर लिया जाएगा। इसके बावजूद करीब 38-40 हजार अग्निवीरों को फिर से रोजगार हासिल करने की चुनौती होगी। अग्निवीरों को अर्धसैनिक बलों, पुलिस बलों, सार्वजनिक उपक्रमों, सरकारी कंपनियों में प्राथमिकता के आधार पर भर्ती करने की घोषणाएं हुई हैं। बीएसएफ ने सिपाहियों के पदों पर भर्ती में सर्वाधिक 50 फीसदी पद अग्निवीरों के लिए आरक्षित किए हैं, जबकि अन्य बलों, पुलिस आदि में 10 फीसदी आरक्षण किया है।
तटरक्षक बल ने कहा है कि वह नौसेना से कार्यमुक्त होने वाले सभी अग्निवीरों को तटरक्षक बल में शामिल कर लेगा। दरअसल, बलों को फायदा यह है कि इससे उनकी ट्रेंनिंग का खर्च बच रहा है क्योंकि अग्निवीर पहले से ही प्रशिक्षित हैं।
गृह मंत्रालय के पोर्टल में कराना होगा पंजीकरण
असल चुनौती एक साल के भीतर 40 हजार कार्यमुक्त अग्निवीरों को समाहित करने की होगी। इनको गृह मंत्रालय के एक पोर्टल में पंजीकृत कराना होगा। लेकिन इसके बाद उन्हें भर्ती निकलने और उसकी प्रक्रिया पूरी होने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। अर्धसैनिक बलों में एक साल में 15-18 हजार ही रिक्तियां निकलती हैं। ऐसे में अग्निवीरों को निजी कंपनियों में नौकरी तलाश करने के साथ अपना रोजगार शुरू करने या फिर उच्च शिक्षा हासिल कर खुद अपना करियर चुनने जैसे विकल्पों पर भी विचार करना पड़ सकता है।
जहां तक जानकारी है कार्यमुक्त अग्निवीरों को गृहमंत्रालय के पोर्टल में पंजीकरण कराना होगा और फिर उन्हें उच्च शिक्षा के साथ और भी मौके मिल सकते हैं। जैसा कि बताते हैं कि कार्यमुक्त अग्निवीरों में से एक चौथाई तो सेना के विभिन्न विभागों के लिए फिर से भर्ती कर लिए जाएंगे। निष्पक्ष सोच रखने वाले नागरिकों की इस बात से मैं भी सहमत हूं कि जब भी अग्निवीर या उनसे संबंध योजनाएं निकले युवाओं को उनमें ज्यादा सक्रियता से भाग लेकर शामिल होना चाहिए क्योंकि ज्यादातर के लिए यह उसके स्थायी रुप से स्थापित होने का माध्यम कह सकते हैं। क्योंकि इसके बाद समाज में कोई उसे यह नहीं कह पाएगा कि खाली बैठा है। क्योंकि वो इस दौरान जो कुछ सीखेंगे उसके माध्यम से सम्मान के साथ दो समय की रोटी और परिवार का पालन पोषण आसानी से कर सकेंगे। ऐसा भी हो सकता है कि आगे चलकर अग्निवीरों की सेवा और उनके समर्पित भाव को देखकर इनके बच्चों को भी इनके साथ साथ अन्य योजनाओं में कार्य करने का मौका मिल सकता है। जो घर बैठे या सिर्फ प्राइवेट ट्रेनिंग लेने से पूरा होने वाला नहीं है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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