मेरठ, 25 मई (दैनिक केसर खुशबू टाईम्स)। अपनी नियुक्ति के बाद से सरकार की निर्माण नीति का पालन कराने अवैध निर्माण कच्ची कालोनियों पर अंकुश और सरकारी भूमि घेरने वालों पर कार्रवाई करने के लिए प्रयत्नशील नजर आ रहे मेरठ मंडलायुक्त श्री भानुचंद गोस्वामी अपने सहयोगियों के साथ काफी प्रयास कर रहे हैं इस संदर्भ में उनके द्वारा पूर्व में चौम्बर ऑफ कॉमर्श बॉम्बे बाजार में आयोजित एक गोष्ठि में स्पष्ट रूप से कहा भी गया था कि नियम अनुसार हर क्षेत्र में काम होगा। अब कमिश्नर द्वारा जनपद में शहर और जनपद तथा लिंक रोड आदियों पर हो रहे अवैध निर्माण और कच्ची कालोनियों का विस्तार करने एवं सरकारी भूमि घेरने वालों की सूची संबंधित विभागोें से मांगी गयी बताई जा रही है।
इस संदर्भ में मेरठ मेडा के अधिकारी मेरठ में डेढ़ सौ के करीब शहर में धड़ल्ले से हो रहे अवैध निर्माणों पर कमिश्नर को नजर दोहो गई है। मेड़ा के अधिकारियों से कमिश्नर ने अवैध निर्माणों की सूची मांगी है। माना जा रहै कि जल्द ही इनके ध्वस्तीकरण का अभिन चलाया जाएगा। इससे पहले कमिश्नर अवैध कॉलोनियों के खिलाफ अभियान चला चुके है। अब तक अवैध कॉलोनियों पर बुलडोजर से ध्वस्तीकरण को कार्रवाई कर चुके हैं। जिससे अवैध कॉलोनियों को काटने वाले संचालकों व मेडा के अधिकारियों में खलबली मची हुई है। बताया गया कि कमिश्नर भानुचंद्र गोस्वामी को सूचना मिली कि शहर में गली मोहल्लों से लेकर मुख्य बाजार संकरी गली वाले क्षेत्र कई स्थानों पर धड़ल्ले से अवैध निर्माण जारी है। बिना सेट बॉक्स व पार्किंग छोड़े कांप्लेक्स, कई मंजिल ऊंची इमारत बनाई जा रही है। जिसमें मेड़ा से बिना नक्शा पास कराए निर्माण कार्य जारी है। कमिश्नर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मेडा के अधिकारियों को शहर में हो रहे अवैध निर्माणों को चिह्नित करने के आदेश दिए। उसने अवैध निर्माणों की लिस्ट मांगी है। जिससे अवैध निर्माणों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा सकें। मेडा के अधिकारी अब कमिश्नर के निर्देश पर शहर में हो रहे अवैध निर्माणों को चिह्नित करने में लगे हुए हैं। आयुक्त जी जानकारों का कहना है इनकी पुरानी सूची निकलवाई जाये तो भी अवैध निर्माण इनसे ज्यादा ही नजर आएंगे।
अब तो लोग शिकायत करने के साथ प्रदर्शन भी करने लगे हैं और भूमाफियाओं की सूचना भी दे रहे हैं।
आयुक्त महोदय पिछले एक वर्ष में अवैध निर्माणों कच्ची कालोनियों और सरकारी जमीन घेरने वालों की विभिन्न तरीकों से संबंधित विभागों के अधिकारियों को नागरिकों द्वारा अपने अपने तरीके से सूचित किया गया। कितने ही अखबारों में खबरें छपी मगर अवैध निर्माण रोकने से संबंध अधिकारियों जेई एई और जोन प्रभारियों की मिली भगत से नागरिकों के अनुसार निर्माण होने के कारण इनकी सूची कभी पूरी तौर पर इनके द्वारा किसी भी अफसर को उपलब्ध नहीं कराई जाती अगर आप चाहते हैं कि अवैध निर्माणों की सही जानकारी हो तो आप अपने अधिकारियों की जो मेडा से संबंध न हो एक टीम बनाकर जांच कराकर तो शहर से गांव देहातों को जोड़ने वाले लिंक मार्गों को जोड़ने सहित पुराने शहर में जमीन का भू उपयोग चेंज कराये बिना बड़ी बड़ी कालोनियां कॉमर्शियल और रिहायशी कॉम्पलैक्स और शोरूम बने मिल जायेंगे।
सील की कार्रवाई और एफआईआर को मजाक बना दिया है मेडा के अधिकारियों ने
मंडलायुक्त जी जानकारों का कहना है कि मेडा मेरठ विकास प्राधिकारण कार्यालय में मौजूद सैकड़ों फाइलों में जिन निर्माणों पर सील लगी है या उन्हें करने वालों पर एफआईआर कराई गयी है तो आपको पता चलेगा कि मेडा के कुछ जोन प्रभारियों एई और जेई आदि के द्वारा इस महत्वपूर्ण कार्यवाई को मजाक बना कर रख दिया हैं। क्योंकि इधर यह सील लगाते हैं और दूसरी तरफ इनकी मिली भगत से उसे तोड़कर निर्माण शुरू हो जाते हैं थानों में एफआईआर के लिए पत्र दिया जाता है उन पर क्या कार्यवाही हुई उसका संज्ञान भी इनके द्वारा नहीं लिया जाता परिणामस्वरूप सील लगे भवन में होटल, शोरूम चल रहे हैं और ध्वस्त की गयी कच्ची कालोनियों में भारी तादाद में लोग रह रहे हैं आखिर कैसे।
फर्जी निस्तारण
कमिश्नर साहब कुछ जागरूक नागरिकों या मीडियाकर्मियों के द्वारा मुख्यमंत्री के जनशिकायत पोर्टल पर अवैध निर्माण कच्ची कालोनियों और सरकारी जमीन घेरने की की गयी शिकायतों का मेडा के अधिकारी फर्जी निस्तरण करके भेज रहे हैं इसके जीते जागते सबूत के रूप में पिछले दो साल में जितनी भी इससे संबंधित शिकायतों का निस्तारण हुआ है उनमें काफी प्रतिशत में ऐसे सरकार के नियम विरोधी काम करने वालों को विभाग के जेई और एई और जोन प्रभारी ने बचाने में कोई कोर कसर नहीं रखी अगर उनकी ही जांच करा ली जाये तो हर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

