भले ही समय से पहले सेवानिवृति प्राप्त कर सामाजिक कार्यो और भ्रष्टाचार के विरूद्ध सक्रिय हुए लेकिन इस सोच को तो सभी को स्वीकारना होगा कि अमिताभ ठाकुर पुलिस विभाग में आईजी से और इसी पद से सेवानिवृत हुए। उनकी कार्यप्रणाली को लेकर जो चल रहा हेै वो अलग बात है लेकिन यह जो मुददा सामने आया हेै कि उनकी गिरफ्तारी के समय उनके पास ४२ हजार रूपये थे लेकिन अब सामान को अवमुक्त करते हुए ७२०८ रूपये ही दिए गए। साथ ही उनके वीवो मोबाइल फोन को लौटाते समय वह बिना पासवर्ड मिला जबकि उनके दोनों फोन में लॉक लगा हुआ था। इस मामले में अमिताभ ठाकुर के पैरवीकार बताने वाले भीमसैन द्वारा इस बारे में सीजेएम कोर्ट में वाद दाखिल किया गया है जिसकी सुनवाई २३ जनवरी को होनी है। उसमें क्या फैसला आएगा वो अलग बात है लेकिन एक उच्च स्तरीय पुलिस अधिकारी की तरफ से पैरोकार बताने वाले ने सीजेएम कोर्ट में वाद भी दायर किया तो ऐसा तो लगता है कि इसमें अमिताभ ठाकुर की सहमति रही होगी वरना ना तो कोई ऐसा आरोप लगाकर मामला दायर नहीं कर सकता। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि यह एक गंभीर आरोप है। इस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए फैसला आने से पूर्व ही यूपी के डीजीपी को इस प्रकरण की जांच करानी चाहिए। क्योंकि अगर दायर वाद के बाद यह फैसला आता है कि गिरफ्तारी के समय जो धन और मोबाइल से संबंध बात कही गई है वो सही है तो पुलिस विभाग के लिए अच्छी बात नहीं होगी। उसकी साख पर भी ठीक असर नहीं पड़ेगा।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
Trending
- काजल चौधरी और चंद्री देवी जैसा सास-बहू में प्यार हो जाए तो देश में रामराज आते देर नहीं लगेगी
- खान सर के कोचिंग के बाहर फायरिंग: कोचिंग डायरेक्टर समेत 3 आरोपी गिरफ्तार
- केवाईसी कराने के लिए चक्कर कटवा रहे बैंक
- शादीशुदा बेटियां परिवार का अभिन्न हिस्सा, अनुकंपा नियुक्ति की हकदारः सुप्रीम कोर्ट
- यूपी में प्रभारी मंत्रियों के एरिया में फेरबदल; CM योगी समेत सभी मंत्रियों को मिली नई जिम्मेदारी
- दिल्ली: मालवीय नगर के लेमन ग्रीन रेस्टोरेंट में आग से 21 लोगों की मौत 37 घायल, मरने वालों में ज्यादातर विदेशी
- बीएस-1, 2 और 3 वाहन होंगे बंद, एनसीआर में शुरू होगा अभियान
- यूपी-बिहार के पुलिस अफसरों को ठगने वाला 10वीं फेल युवक गिरफ्तार
