मेरठ 29 मई (प्र)। देश की प्रथम रीजनल रैपिड रेल यानी नमो भारत के संचालन के साथ ही दिल्ली रोड व रुड़की रोड के आसपास बदलाव दिखाई देने लगा है। अगले कुछ वर्षों में कई बड़े परिवर्तन होने वाले हैं। इसी परिवर्तन में एक नया प्रस्ताव पेयजल के रूप में गंगाजल के उपयोग का है। कारिडोर के किनारे जिन कालोनियों व गांवों में अभी तक गंगाजल की आपूर्ति नहीं हो रही, उन्हें अब पेयजल के रूप में गंगाजल मिलेगा। मोहिउद्दीनपुर में विकसित हो रही प्रदेश की पहली टीओडी टाउनशिप में भी गंगाजल की आपूर्ति की जाएगी। कारिडोर के आसपास विश्वस्तरीय विकास को गति देने के लिए मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) ने नौ जोनल प्लान बनाए हैं। इसी में विजन-2054 के अंतर्गत गंगाजल की दो नई पेयजल वितरण लाइन बिछाने का प्रस्ताव शामिल किया है। जोनल प्लान अभी शासन में लंबित है, जिस पर मुहर लगने के बाद प्रस्ताव विभिन्न चरणों में आकार लेंगे।
मोहिउद्दीनपुर स्थित न्यूटाउनशिप व दिल्ली रोड पर गंगाजल पहुंचाने के लिए सिवालखास मोहिउद्दीनपुर रोड पर एक वितरण लाइन बिछाई जाएगी। इसके लिए गंगनहर के नजदीक सिवालखास क्षेत्र में विशेष तालाब (इनटेक वेल) बनेगा। इसके लिए प्रथम चरण में 20 तथा दूसरे चरण में 14 एमएलडी का जल शोधन संयंत्र बनेगा। दो स्वच्छ जल जलाशय (सीडब्ल्यूआर) व पुनर्चक्रित जल जलाशय (आरडब्ल्यूआर) के साथ चार ट्यूबवेल मोहिउद्दीनपुर, भूडबराल गांव, परतापुर, मोहकमपुर व उसके बाद की कालोनियों को भी यहीं से पेयजल मिलेगा। वहीं मोदीपुरम की तरफ गंगाजल आपूर्ति के लिए गंग नहर के पास सरधना क्षेत्र में इनटेक वेल बनेगा। सरधना दौराला रोड पर वितरण लाइन बिछाई जाएगी।
मोदीपुरम में दो चरणों में 44 एमएलडी का जलशोधन संयंत्र लगेगा। जलाशयों के साथ ही छह ट्यूबवेल बनेंगे। मोहम्मदपुर हयाक गांव, सिवाया गांव को भी इससे आपूर्ति होगी। 100 एमएलडी भोला की झाल स्थित जलशोधन संयंत्र से फिलहाल पीएल शर्मा स्मारक, टाउन हाल, सर्किट हाउस, विकासपुरी जलाशय के माध्यम से आपूर्ति होती है। कुल 90 में से करीब 22 वार्डों में गंगाजल की आपूर्ति होती है। बाकी 68 वार्डों में भूजल दोहन करके नलकूपों से जलापूर्ति की जाती है। मेडा के उपाध्यक्ष संजय कुमार मीना ने बताया कि जोनल प्लान के तहत विभिन्न सुविधाओं का विकास प्रस्तावित है। जोनल प्लान लखनऊ में लंबित है।
भूजल दोहन रोकने की योजना से बना प्रस्ताव
दिल्ली रोड व रुड़की रोड पर ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) नीति लागू है। नमो भारत कारिखेर के कारण इस क्षेत्र का विश्वस्तरीय विकास प्रस्तावित है। इसी कड़ी में इसके लिए योजना बनाई गई है। इसके आसपास की कालोनियों व गांवों को ट्यूबवेल के बजाय गंगाजल का पानी दिया जाए ताकि भूजल दोहन रोका जा सके।

