नई दिल्ली, 16 जनवरी। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि केरल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के बाद मसौदा मतदाता सूची से जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उनका नाम प्रकाशित किया जाए ताकि प्रभावित मतदाता अपनी आपत्ति दर्ज करा सकें। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने आयोग से यह भी कहा कि वह नाम हटाए जाने के खिलाफ आपत्तियां दाखिल करने की समय-सीमा को, वरीयता से दो सप्ताह , बढ़ाने पर विचार करे। आयोग की ओर से पेश वकील ने कहा कि समय-सीमा बढ़ाने पर विचार किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि केरल में एसआईआर प्रक्रिया के बाद मसौदा मतदाता सूची से जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उनका नाम प्रकाशित किया जाए ताकि प्रभावित मतदाता आपत्ति दर्ज करा सकें।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने आयोग से यह भी कहा कि वह नाम हटाए जाने के खिलाफ आपत्तियां दाखिल करने की समय-सीमा को, वरीयता से दो सप्ताह के लिए, बढ़ाने पर विचार करे। आयोग की ओर से पेश वकील ने कहा कि समय-सीमा बढ़ाने के मुद्दे पर विचार किया जाएगा। पीठ केरल में अपनाई गई एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक समूह की सुनवाई कर रही थी।
वेबसाइट पर अपलोड करें सूचीरू पीठ ने कहा कि यदि प्रारूप मतदाता सूची से बाहर किए गए व्यक्तियों के नाम पहले से प्रदर्शित नहीं किए गए हैं, तो उन्हें ग्राम पंचायत कार्यालयों या सार्वजनिक कार्यालय में प्रदर्शित किया जाना चाहिए। व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सूची आधिकारिक वेबसाइट पर भी अपलोड की जाए।
मामले में याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने बताया कि संशोधित ड्राफ्ट सूची में लगभग 24 लाख नाम हटाए गए हैं। जबकि मतदाता आपत्ति दर्ज कर सकते हैं, हटाए गए लोगों की सूची उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसके कारण प्रभावित मतदाता यह जानने में असमर्थ हैं कि उनका नाम क्यों हटाया गया और वे आपत्ति कैसे दर्ज कराएं। कुछ मामलों में मतदाताओं को मृत दिखाया गया है या उन्हें राज्य के बाहर के रूप में चिह्नित किया गया है। इस पारदर्शिता की कमी से ग्रामीण क्षेत्रों के मतदाताओं को काफी कठिनाई हो रही है।
इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि यदि यह सूची अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है, तो इसे ग्राम पंचायत कार्यालय या गांवों में किसी अन्य सार्वजनिक कार्यालय में प्रदर्शित किया जाना चाहिए। साथ ही इसे आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया जाए ताकि अधिक से अधिक लोग इसे देख सकें। सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग से यह भी कहा कि मतदाताओं की कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए आपत्ति दर्ज कराने की तारीख बढ़ाने पर विचार किया जाए।
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