मेरठ, 20 जुलाई (प्र)। सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मोदीपुरम में सोमवार को आयोजित दीक्षांत समारोह में शैक्षणिक उत्कृष्टता का माहौल रहा। इस गरिमामयी अवसर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।
राज्यपाल ने लगभग 12 बजे समारोह स्थल पर पहुंचकर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। समारोह में गुजरात विधानसभा अध्यक्ष शंकरभाई चौधरी, प्रदेश सरकार के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह, और पतंजलि योगपीठ के महासचिव आचार्य बालकृष्ण जैसे प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्ति भी शामिल हुए। इस समारोह में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के 450 विद्यार्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी की उपाधियां प्रदान की गईं। यह उपाधि वितरण न केवल विद्यार्थियों के वर्षों की कड़ी मेहनत का प्रतिफल था, बल्कि यह कृषि क्षेत्र में उनके भविष्य के योगदान का भी प्रतीक था। शैक्षणिक उत्कृष्टता को मान्यता देते हुए 21 मेधावी छात्र-छात्राओं को स्वर्ण, रजत और अन्य पदकों से सम्मानित किया गया।
कृषि में नवाचार और आधुनिकता पर जोर
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने अपने संबोधन में कृषि को आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और नवाचार से जोड़ने की उत्तर प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाले संस्थान नहीं हैं, बल्कि ये किसानों की समृद्धि और देश की खाद्य सुरक्षा के मजबूत आधार स्तंभ हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में, प्रदेश सरकार कृषि शिक्षा, अनुसंधान, प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि, गुणवत्तापूर्ण बीज, आधुनिक कृषि यंत्रीकरण और नई तकनीकों के प्रसार पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विश्वविद्यालयों में विकसित नई तकनीकों और शोध को प्रयोगशालाओं तक सीमित न रखकर खेतों तक पहुंचाना आवश्यक है, जिससे उत्पादन बढ़े, खेती की लागत घटे और किसानों की आय में वृद्धि हो। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी शिक्षा और शोध का उपयोग कृषि क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान खोजने में करें।
कृषि और आयुर्वेद का संगम
पतंजलि योगपीठ के महासचिव आचार्य बालकृष्ण ने कृषि और आयुर्वेद के समन्वय से एक समृद्ध भारत के निर्माण की परिकल्पना प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि कृषि केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता का आधार है। कृषि और आयुर्वेद एक-दूसरे के पूरक हैं और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर स्वस्थ समाज व समृद्ध राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने किसानों को औषधीय एवं जैविक खेती के लिए प्रेरित करने की पतंजलि की भूमिका का उल्लेख किया और कृषि में नवाचार, अनुसंधान तथा आधुनिक तकनीक के साथ भारतीय पारंपरिक ज्ञान के समन्वय को समय की आवश्यकता बताया।
किसानों की आय बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना
कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए नई योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू कर रही है। उन्होंने विश्वविद्यालयों और कृषि वैज्ञानिकों की भूमिका को खेती को नई दिशा देने में अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। मुख्य अतिथि शंकरभाई चौधरी ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में कृषि और पशुपालन की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने उत्तर प्रदेश को आलू उत्पादन और निर्यात का प्रमुख केंद्र बताते हुए कहा कि प्रदेश से होने वाले कुल आलू निर्यात का लगभग 33 प्रतिशत योगदान उत्तर प्रदेश का है। उन्होंने पशुपालन को किसानों की आय बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बताया और कहा कि उत्तर प्रदेश दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

