हमारे जनप्रतिनिधि सांसद हो या विधायक यह बात सही है कि उनके चुनाव क्षेत्र बड़े होते हैं और आवागमन भी पूरा रहता है। अगर कोई मिलने आए और चाय के लिए ना पूछा जाए तो वो भी सही नहीं होता। लेकिन वर्तमान में जब देश की आधी से ज्यादा आबादी आर्थिक रूप से परेशान है ऐसे में मात्र राज्यसभा सांसदों द्वारा दो साल में २६२ करोड़ रुपये खर्च किया जाना कहां तक उचित हैं इसे लेकर माननीयों को खुद चर्चा करनी चाहिए। आरटीआई में मिली जानकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में राज्यसभा सदस्यों पर सरकारी खजाने से 98 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए, जबकि 2025-26 में यह राशि बढ़कर 163 करोड़ रुपये से अधिक हो गई। इस प्रकार एक ही साल में उनके खर्च में लगभग 65 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की गई। बताते हैं कि इस खर्च में घरेलू और विदेशी यात्राएं, कार्यालय व्यय तथा चिकित्सा बिल के अतिरिक्त वेतन, भत्तों और विभिन्न सुविधाओं पर यह खर्च बताया जाता है। जनप्रतिनिधि समाज के प्रमुख लोगों कोभी अपने यहां आने पर पानी भले ही पूछ लें उससे आगे की नौबत नहीं आने देते। दूसरी तरफ जो मैंने देखा भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राज्यसभा सांसद डॉ लक्ष्मीकांत वाजपेयी जिस प्रकार से एक सामान्य गाड़ी से एक गार्ड के साथ घूमते और कार्यक्रमों में जाते हैं। तो अगर सारे सांसद उनका अनुशरण करे तो यह खर्च २०२६-२७ में घट सकता है। खबर के अनुसार जो तथ्य सामने आ रहे हैं उससे यह आभास होता है कि अगर सभी सदस्य जनहित को ध्यान में रखकर खर्च में कटौती अपनाएं तो शायद यह खर्च ६२ करोड़ बढ़ने की बजाय इससे ज्यादा कम हो सकता है। जरुरत इस बात की है कि कुछ जनप्रतिनिधि गाड़ियों की लंबी कतार अपने साथ लेकर चलते हैँ औरअपने रहन सहन की भव्यता बनाए रखना चाहते हैं उन्हें थोड़ा सा ध्यान कर यह सब अपने निजी साधनों से पूरी करनी चाहिए। सबसे बड़ी बात राज्यसभा सदस्यों को तो चुनाव में भी खर्च नहीं करना पड़ताहै क्योंकि सबको पार्टी के प्रति समर्पित विधायकों की वोट मिलती है जिनमें कुछ अपवाद हटा दिए जाऐ तो सब अपने दल और नेता की बात ध्यान में रखकर वोट देते हैं। जागरुक नागरिकों की यह बात सही है कि हम गरीब तो नहीं है और विकसित देशों की बराबरी कर रहे हैं मगर फिर भी नागरिकों को वो सुविधाएं नहीं मिल रही जो मिलनी चाहिए इसे हर उस आदमी को ध्यान रखना होगा जो जनता के टैक्स के पैसे से वेतन पाता है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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