उच्च प्रशासनिक और पुलिस पदों पर विराजमान अधिकारी आत्महत्या क्यों करते हैं और हर मौत को संदिग्ध क्यों माना जाता है, इस पर अब आम नागरिकों में चर्चा होने लगी है। अगर एक दशक का इतिहास उठाकर देखें तो मीडिया में ऐसी कितनी ही खबरें पढ़ने को मिली कि फला उच्च अधिकारी द्वारा आत्महत्या कर ली गई। या उसकी मौत को संदिग्ध माना जा रहा है। लेकिन आज तक यह बात स्पष्ट पूरी तौर पर ज्यादातर मामलों में नहीं हुई कि आत्महत्या क्यों की और उसकी मौत संदेह के दायरे में क्यों।
अब अगर हम त्रिपुरा के डीजीपी अनुराग धनखड़ जी का मामला ही लें जो अब नहीं रहे। खबर छपी है कि शु़रुआती जांच की परिस्थितियों को देखते हुए इसे आत्महत्या का मामला माना जा रहा है। और शंका जताई जा रही है उन्होंने अपनी सर्विस रिवाल्वर से खुद को गोली मार ली। दूसरी तरफ यह भी कहा जा रहा है कि धनखड़ की मौत संदिग्ध है। पुलिस के क्षेत्र में किसी भी प्रदेश का महानिदेशक होना अपने में बड़ी बात है। तो उन तथ्यों को खोजकर दूर किया जाना चाहिए जिनके चलते ऐसे शीर्ष अफसर आत्महत्या करने के लिए क्यों प्रेरित हो रहे हैँ और अगर उनकी मौत संदिग्ध है तो यह विभाग के लिए शर्म की बात है कि पुलिस मुख्यालय में ऐसा सब हो गया। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अनुराग धनखड़ मूल रुप से यूपी के जिला बागपत निवासी हैं और १९९४ बैच के पुलिस अधिकारी। खबर में कहीं यह भी चर्चा नहीं है कि वो किसी बात से परेशान थे। फिर जिस जिले के वो रहने वाले थे वहां के लोग मजबूत इच्छाशक्ति के होते हैं तो धनखड़ तो साधन संपन्न थे और उच्च पद पर थे। ऐसे में दोनों बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हो। क्योंकि एक पुलिस या प्रशासनिक अधिकारी बनने तक अभिभावकों और सरकार को काफी आर्थिक व्यवस्थाएं लगानी पड़ती हैं। ऐसे में कोई अपने पद से इस्तीफा दे या आत्महत्या कर ले अथवा कोई उसकी मौत का कारण बने तो इसे सामान्य घटना नहीं कहा जा सकता। आम आदमी कठिनाईयों में होने पर थाने जाता है और समस्या समाधान की माग करता है। तो डीजीपी जैसे पद पर विराजमान शख्स के साथ ऐसा क्यों हुआ एजेंसी भ्ीा इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि किस वजह या दबाव के चलते उन्हेोंने अपनी जान दी। मेरा मानना है कि केंद्रीय गृह कानून और कार्मिक मंत्रालय को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जो हर जिले से लेकर केंद्र तक में तैनात अफसर हो या कर्मचारी साल में एक बार उसकी कांउसिलिंग की जाए। जरुरी नहीं की कोई गलत कदम उठाए लेकिन ऐसा करने से वो तथ्य भी सामने आ सकते हैं जिनके चलते भविष्य में भी बड़ी घटनाएं अंजाम लेने से पहले हीर रूक सकती हैं।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
Trending
- कृषि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 450 विद्यार्थियों को दीं उपाधियां, 21 को पदक
- स्टांप चोरी में करोड़ों का नहीं जांच होने पर बिल्डरों व ठेकेदारों का निकलेगा अरबों का खेल
- दो साल में राज्यसभा सदस्यों ने खर्च किए 262 करोड़, सांसद विधायक मितव्यतिता बरतें तो जनसमस्याओं का हो सकता है समाधान, खर्चों में कमी वाजपेयी से प्रेरणा लेकर की जा सकती है
- त्रिपुरा के डीजीपी धनखड़ ने क्यों की आत्महत्या, संदिग्ध मौत है तो कैसे
- लॉर्ड्स में शतक जमाने के बाद रोहित शर्मा ने तोड़ी चुप्पी
- 23 जुलाई को सीएम योगी गोरखपुर को देंगे सिक्सलेन फ्लाईओवर की सौगात, ₹429.49 करोड़ की लागत से तैयार फ्लाईओवर करेंगे उद्घाटन
- नमित मल्होत्रा की रामायणम् ने हर तरफ जबरदस्त उत्साह पैदा कर दिया
- ‘तुझसा कोई दूजा नहीं’ गीत को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही
