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अहमदाबाद : साबरमती जेल के हाई सिक्युरिटी सेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई का नेटवर्क मुंबई समेत कई राज्यों में एक्टिव है। टाइगर श्रॉफ पर हमले में भी लॉरेंस बिश्नोई का नाम सामने आया। इस हमले के बाद लॉरेंस बिश्नोई को साबरमती जेल के स्पेशल हाई सिक्युरिटी ब्लॉक दो सौ खोली में शिफ्ट किया गया है। इससे पहले बिश्नोई को दस खोली ब्लॉक में रखा गया था। दो सौ खोली सेल में आतंकवादी और खतरनाक क्रिमिनल रखे जाते हैं। इस ब्लॉक की क्षमता 200 कैदियों की है, इसलिए इसे दो सौ खोली कहा जाता है।
लॉरेंस बिश्नोई को 2023 में बठिंडा जेल से साबरमती जेल भेजा गया था, जहां उसे हाई सिक्युरिटी वाले दस खोली ब्लॉक में रखा गया। इस ब्लॉक के सेल में सिर्फ 10 कैदी रखे जाते हैं।
7.5x11 फीट का है सेल
साबरमती जेल में लॉरेंस का बाहरी दुनिया से संपर्क काट दिया गया। यहां तक कि उसके वकील भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये उससे बात करते थे। कोर्ट में पेशी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से ही होती थी।पूरी तरह से अलग-थलग रखने और एक सेल से दूसरे सेल में जाने से रोकने के लिए, इस ब्लॉक को चार हिस्सों में बांटा गया है, जिनमें से प्रत्येक में 50 कैदी रहते हैं। उसके सेल का आकार लगभग 7.5x11 फीट है। यह कदम लॉरेंस बिश्नोई की गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए बनाई गई एक व्यापक सुरक्षा योजना का हिस्सा है।
दो साल से लॉरेंस बिश्नोई की किसी से नहीं हुई बात
लॉरेंस बिश्नोई को ऐसे ब्लॉक में रखा गया है जहां 2008 के धमाकों के दोषी भी बंद हैं। 2023-2024 से पहले, लॉरेंस अक्सर जबरन वसूली के लिए कॉल करता था, अपने नेटवर्क को चलाने के लिए धमकी भरे ऑडियो और वीडियो संदेश भेजता था और यहां तक कि अलग-अलग जेलों से इंटरव्यू भी देता था। लेकिन जांचकर्ताओं के अनुसार, पिछले दो सालों में उसकी तरफ से कोई भी सीधा कॉल या बातचीत नहीं हुई है।
इस ब्लॉक में रहते हैं गंभीर मामलों के दोषी
पिछले दो सालों में, जांचकर्ताओं को लॉरेंस बिश्नोई की ओर से कोई भी सीधा कॉल या बातचीत देखने को नहीं मिली है। 'ब्लॉक 200' साबरमती जेल का एक ऐसा हाई-सिक्योरिटी इलाका है, जहां 2008 के सीरियल ब्लास्ट केस और अन्य गंभीर मामलों के दोषी रखे जाते हैं। यहां आमतौर पर वे कैदी रखे जाते हैं जिन्होंने गंभीर अपराध किए हैं। जिन्हें BNSS की धारा 303 के प्रावधानों के तहत जेल से बाहर जाने की अनुमति नहीं है।