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    Home»देश»ऑनलाइन के मुकाबले ऑफलाइन परीक्षा ही उचित है सिर्फ पारदर्शिता बनी रहे तो
    देश

    ऑनलाइन के मुकाबले ऑफलाइन परीक्षा ही उचित है सिर्फ पारदर्शिता बनी रहे तो

    adminBy adminMay 16, 2026No Comments4 Views
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    हर स्तर की परीक्षा में नकल रोकने और इस मामले में सक्रिय अपराधियों की धरपकड़ के हो रहे प्रयासों के बाद विपक्ष द्वारा बीते दिनों हुई एक उच्च स्तरीय परीक्षा में नकल को लेकर जो निशाने साधे गए उसे देखकर यह कह सकते हैं कि सरकार को इस संदर्भ में गोपनीय और प्रभावशाली निर्णय लेने होंगे। बीते दिनों नीट यूजी २०२६ के पेपर लीक के सरगना को पकड़ लिए जाने की खबर है। १२० टेलीग्राम चौनल ब्लॉक किए गए। तो छात्रों को परीक्षा के लिए अपनी पसंद के दो शहर चुनने का मौका दिए जाने की बात भी सामने आई है। इसके साथ ही अब ऑनलाइन परीक्षा को ज्यादा सुरक्षित बताया जा रहा है। एग्जाम कैसे कराने हैं यह देखना केंद्रीय मंत्रालय का काम है। पेपर आउट ना हो यह गृहमंत्रालय की जिम्मेदारी है मगर ऐसे मामलों में जो युवाओं का भविष्य अंधकार मय हो रहा है और नीट यूजी परीक्षा निरस्त होने के बाद कुछ युवाओं ने जो आत्महत्या की उसे ध्यान रखते हुए मुझे लगता है कि हर स्तर पर ऐसी चक्रव्यूह की रचना हो जिससे कोई भी नकल कराने वाले परीक्षाओं को प्रभावित ना कर पाएं। जहां तक ऑनलाइन परीक्षा होना ज्यादा सुरक्षित बताया जा रहा है मैं कुछ विशेषज्ञों की इस राय को तो नहीं काट रहा हूं लेकिन जहां तक मेरा अल्पज्ञान है उससे मुझे लगता है कि ऑनलाइन परीक्षा ज्यादा सुरक्षित रहने वाली नहीं है। क्योंकि सोशल मीडिया मंचों और इंटरनेट पर ऐसे अनेको उपाय मौजूद हैं जिनसे हर बात का पता किया जा सकता है। जैसा कि हमारी भारतीय फिल्मों में दिखाया जाता है कि युवा हैकर ने दबाव या कुछ पैसों के लिए महत्वपूर्ण साइट हैक कर दी। ऐसे में जब अभेद सुरक्षा वाली साइट हैक हो सकती है किस समय दुनिया में कौन कहां है यह पता चल जाता है तो भला ऐसे में ऑनलाइन परीक्षा सुरक्षित कैसे हो सकती है। वैसे तो संबंधित इस संबंध में बहुत काम रहे हैं लेकिन मुझें लगता है कि परीक्षा ऑफलाइन ही हो बस गोपनीयता बनाए रखने की आवयश्यकता है। इस बारे में नामचीन लोगों का ग्रुप बनाया जाए जिसे कुछ दिनों सुरक्षा के बीच सुविधाएं उपलब्ध कराकर रखा जाए तो हो सकता है कि जब कोई पायजामा सिलवाता है तो मूतने का रास्ता निकालता है वाली कहावत झूठी हो जाए और नकल कराने वालों का उददेश्य विफल हो और याुवाओं का भविष्य सुरक्षित हो। इसके लिए ईमानदारी देशभक्ति से पूर्ण सोच की व्यवस्था हो तभी यह संभव है। ऑनलाइन परीक्षाओं से नहीं।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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