मेरठ 30 मई (प्र)। शास्त्रीनगर की आवासीय योजना में बने नगर निगम के नए जोनल ऑफिस, कार्यालय परिसर और अर्बन प्लाजा का मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। आवासीय भूमि पर बिना मानचित्र स्वीकृति व्यावसायिक निर्माण कराने के आरोपों को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने नगर निगम मेरठ को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई 2026 को होगी। इस प्रकरण ने नगर निगम के निर्माण कार्यों और स्वीकृति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जनहित याचिका लोकेंद्र खुराना की ओर से दाखिल की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद की शास्त्रीनगर गृहस्थानम योजना संख्या-7 में शामिल खसरा संख्या 6041 की आवासीय भूमि पर बिना मानचित्र स्वीकृति नगर निगम का नवीन कार्यालय परिसर, शास्त्रीनगर जोन कार्यालय और अब 120 दुकानों वाला व्यावसायिक परिसर अर्बन प्लाजा बनाया जा रहा है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ में हुई। कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से मुख्य सचिव से जारी 23 मार्च परिषद की जमीन पर निर्माण 2026 का आदेश प्रस्तुत किया गया।
याचिकाकर्ता पक्ष के अधिवक्ता राजेश मिश्रा ने आदेश का अध्ययन करने के लिए समय मांगा, जिसके बाद अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 16 जुलाई तय कर दी। इस पूरे प्रकरण में खास बात यह है कि आवास एवं विकास परिषद पहले ही निर्माण कार्यों पर आपत्ति दर्ज करा चुका था।
परिषद के अधिशासी अभियंता आफताब अहमद ने अधिशासी अभियंता (निर्माण) नगर निगम मेरठ को कई पत्र भेजकर निर्माण से संबंधित स्वीकृत मानचित्र की प्रति मांगी थी। परिषद का कहना था कि योजना क्षेत्र में किसी निर्माण के लिए परिषद स्तर से मानचित्र स्वीकृति आवश्यक है, लेकिन नगर निगम की ओर से कोई स्वीकृति उपलब्ध नहीं कराई गई। इतना ही नहीं, परिषद के अवर अभियंता ने 9 दिसंबर 2025 को निर्माण को अवैध और अनाधिकृत बताते हुए निर्माण रोकने का नोटिस भी जारी किया था। नौचंदी थाना प्रभारी निरीक्षक को भी पत्र भेजकर निर्माण रुकवाने के लिए प्रभावी कार्रवाई का अनुरोध किया गया था। इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहने के आरोप लगाए गए हैं।
आवास एवं विकास परिषद के निर्माण खंड मेरठ-01 कार्यालय से जारी पत्रों में यह भी उल्लेख किया गया कि परिषद की योजना क्षेत्र की भूमि पर बिना मानचित्र स्वीकृति और अन्य संबंधित विभागों से अनुमति लिए निर्माण कराया गया। अब हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है। लोगों की नजरें अब 16 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।

