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    Home»देश»उदयनिधि जी हार से बौखलाएं नहीं आपके कारण ही आपकी पार्टी की आज यह स्थिति है, सनातन परंपरा एक विचारधारा है जिसे मिटाने की कोशिश करने वाले रहे नहीं मानने वाले आज भी नजर आते हैं
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    उदयनिधि जी हार से बौखलाएं नहीं आपके कारण ही आपकी पार्टी की आज यह स्थिति है, सनातन परंपरा एक विचारधारा है जिसे मिटाने की कोशिश करने वाले रहे नहीं मानने वाले आज भी नजर आते हैं

    adminBy adminMay 13, 2026No Comments8 Views
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    देश के सबसे पुरानी और मजबूत आस्था की प्रतीक सनातन धर्म धर्म विचारधारा कोई पानी का बुलबुला नहीं है जिसे समाप्त कर दिया जाए। पिछली शताब्दियों में बहुत से बादशाह आए जिन्होंने सनातन धर्म की समाप्ति और उसे मानने वालों का उत्पीड़न करने में कोई कसर नहीं छोड़ी लेकिन आज वो तो कहीं नहीं है मगर सनातन विचारधारा आज भी अटल है और कल भी रहेगी। तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव हारने के बाद लगता है उदयनिधि स्टालिन बौखला गए हैं और सनातन धर्म को विभाजनकारी बताकर समाप्त किए जाने की मांग कर रहे हैं। बताते चलें कि इससे पूर्व भी उदयनिधि द्वारा कुछ ऐसे ही विचार व्यक्त किए गए थे लगता है कि उसी के परिणामस्वरूप एकछत्र राज करने वाली इनकी पार्टी का सफाया हो गया। क्योंकि तमिलनाडु हो या देश को कोई और राज्य सब जगह सनातन विचारधारा के समर्थक मौजूद हैं और भले ही यह कटटरपंथी ना हो मगर इनकी आस्था और विश्वास पूर्ण रूप से मजबूत हैं। बस यह समयानुकूल निर्णय लेते हैं। विनाशकारी विचारधाराओं से प्रेरित होकर कोई गलत निर्णय इनके द्वारा नहीं लिया जाता। इसलिए सनातन आज भी अमर है और कल भी रहेगा।
    बुजुर्ग एक किस्सा सुनाते हैं कि अकबर के दरबार में बीरबल की बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर अन्य वजीर व ओहदेदार अकबर को भड़काते थे एक दिन कहा कि सबने इस्लाम धर्म कबूल किया बीरबल ने क्यों नही। जब बीरबल से पूछा तो उन्होंने कहा कि सात दिन का समय दीजिए जवाब दे दूंगा। विरोधी परेशान थे। सातवे दिन उनके द्वारा फिर बादशाह से अपील की और बीरबल से पूछा कि क्या हुआ तो बीरबल ने कहा कि एक रबर का पेड़ मंगवा लीजिए। रबर का पेड़ मंगवाया गया और बीरबल ने फिर हाथी बुलाने को कहा।
    जब पेड़ से उसने पैर हटाया तो वह फिर खड़ा हो गया। बादशाह ने इसका मतलब पूछा तो बीरबल ने कहा कि हम सनातनधर्मी समयानुसार निर्णय लेते हैं और धर्म परिवर्तन की जरुरत नहीं पड़ती और हम किसी का विरोध नहीं करते। यह किस्सा बताता है कि भले ही सनातनधर्मी अडिग ना रहते हो लेकिन धर्म के प्रति बहुसंख्यक पूरी तौर पर समर्पित रहते हैं। अब फिल्म स्टार और पहली बार राजनीतिक दल बनाने और फिर तमाम कठिनाईयों के बाद चुनाव जीतकर आए सीएम विजय चुनाव तो जीते ही सीएम भी बन गए और जिस तरह विपक्ष के लोग टूटकर उनके साथ आ रहे हैं और देश में दूसरे नंबर की पार्टी कांग्रेस ने समर्थन दिया है तो वो और मजबूत होंगे। ऐसे में उदयनिधि जी सनातन को भूल अपनी पार्टी का भविष्य बचाईये क्योंकि आपकी यही हालत रही तो वो दिन दूर नहीं जब आपकी स्थिति यूपी में बसपा जैसी ना हो जाए क्योंकि इसकी अध्यक्ष कई बार सीएम रहीं और केंद्र में भी पूरी धमक के साथ भले ही और प्रदेशों में सत्ता में ना रही हो मगर उनका वर्चस्व सब जगह बना रहता था। लेकिन आज की तारीख में किसी भी सदन में उनका कोई सदस्य नहीं है। उन्होंने सिर्फ जरा सा विपक्ष का जो मुखरपन होता है उसे ना अपनाते हुए थोड़ी विनम्रता बरती परिणाामस्वरूप भाजपा उनके जनाधार को अपने साथ लाने में सफल रहा जो बचा उसे सपा ले गई। कहने का मतलब है कि मायावती सुलझे विचारों की अपने समर्थकों के प्रति अच्छा दृष्टिकोण रखने वाली नेता है मगर उनके जो तेवर शुरु में देखने को मिलते थे वो अब लगभग समाप्त हो गए हैं और अकेले चुनाव लड़ने का उनका फैसला समर्थकों को रास नहीं आ रहा। मुझे लगता हैकि उदयनिधि जी आपके पिता जी ने जो राजनीति में एक स्थान प्राप्त किया था आपकी वजह से धीरे धीरे वो समाप्त हो सकता है। इसलिए सनातन धर्म विभाजनकारी है इसे समाप्त किया जाए जैसे शब्दों कोभूलकर इस पर निशाना साधने की बजाय अपनी पार्टी को मजबूत करिए। अपने देश में तो हर कदम पर चाहे तमिलनाड़ु हो या उत्तर प्रदेश सनातन संस्कृति को बनाए रखने क ेलिए उसके समर्थक मौजूद हैं। लेकिन जिस प्रकार से भरे पूरे कमरे में जल रहे दीये बुझ जाते हैं लेकिन एक दीया ही रोशनी के लिए काफी है ऐसी ही स्थिति हम सनातन की समझ सकते हैं। बाबा केदार सनातन संस्कृति का आधार विस्तार और विचार हैं और आप यह समझ ले कि हर गली मोहल्ले में इस परंपरा को आगे बढ़ाने वाले मौजूद हैं। फिर इतिहास गवाह है कि धर्म को लेकर बड़े अत्याचार सहे गए लेकिन करने वाले विलुप्त हो गए और सहने वाले आज भी मजबूती के साथ खड़े हैं। मैं यह नहीं कहता कि किसी पर आप धर्म या नीति थोपने की कोशिश करें लेकिन किसी भी धर्म का अपमान ना कर सर्वधर्म सदभाव की नीति को मानने से इनकार नहीं करना चाहिए। यही आपकी उन्नति और प्रगृति का माध्यम भी होता है।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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