नई दिल्ली 22 मई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बड़े उद्योगपतियों और कंपनियों को भारी- भरकम कर्ज देने में बैंक अक्सर लापरवाही बरतते हैं। वहीं आम लोगों को छोटे ऋण के लिए भी सख्त और अक्सर थकाने वाली प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है, जो कुछ मामलों में उत्पीड़न की सीमा तक पहुंच जाती हैं। अदालत ने कहा कि यह बड़े कर्ज पर नरमी और छोटों पर सितम जैसी बात है।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने यह टिप्पणी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एक आदेश के खिलाफ मेसर्स भास्कर इंटरनेशनल प्रा. लि. की याचिका पर सुनवाई करते हुए की है। हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ किया कि वह लोन देने के नियमों में किसी तरह की ढील का सुझाव नहीं दे रहा है। कोर्ट ने कहा कि ये नियम तय करने का काम रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और खुद बैंकों पर ही छोड़ देना बेहतर है। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि लोन देने और उसे वसूलने की प्रक्रियाओं को अधिक आसान और निष्पक्ष बनाया जाना चाहिए। पीठ ने कहा कि रियायतें और प्रोत्साहन देने से जुड़ी नीतियां इस तरह से बनाई या तय की जानी चाहिए कि सामाजिक और आर्थिक रूप से सबसे निचले पायदान पर खड़े लोगों को इसका अधिक से अधिक फायदा मिल सके।
खाते को पांच छह महीनों में एनपीए घोषित कर देना मनमाना
कंपनी के वकील ने यह दलील दी कि खाते को महज पांच- छह महीनों के भीतर ही एनपीए घोषित कर देना मनमाना और एसबीआई अपनी ही नीति के खिलाफ था। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि उन्होंने लोन की पूरी मूल राशि चुकाने की पेशकश की थी, जिसे एसबीआई ने स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कोर्ट से गुजारिश की कि उन्हें कुछ मदद के साथ अपनी कंपनी को फिर से शुरू करने का एक मौका दिया जाए।
व्यावसायिक शर्तों पर लोन बावजूद एक भी किस्त चुकाने में नाकाम रहे
दूसरी ओर एसबीआई ने यह तर्क दिया कि लोन लेने वालों ने व्यावसायिक शर्तों पर लोन लिया था, इसके बावजूद वे एक भी किस्त चुकाने में नाकाम रहे। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने याचिकाकर्ता कंपनी को कई बातों पर कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि 8.09 करोड़ रुपये का लोन लेने के तुरंत बाद ही किश्तें चुकाना बंद कर देना और फिर लगभग छह साल बाद आकर केवल मूल राशि चुकाने की पेशकश करना, यह सब बहुत कम और बहुत देर से उठाया गया कदम है।
इस मामले में कंपनी ने 2019 में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से 8.09. करोड़ रुपये का लोन लिया था लेकिन कुछ ही महीनों के भीतर उसने किश्तें चुकाना बंद कर दिया। इसके चलते 29 जुलाई, 2019 को कंपनी के खाते को नॉन परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए) घोषित कर दिया गया। एसबीआई ने सरफैंसी एक्ट के तहत लोन वसूली की प्रक्रिया शुरू की और मई 2024 में यमुनानगर के जिला मजिस्ट्रेट से कंपनी की गिरवी रखी गई संपत्तियों पर कब्जा करने का आदेश हासिल कर लिया। बाद में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने भी इन संपत्तियों पर जल्द से जल्द कब्जा करने का निर्देश दिया।

