पुरी, 26 मार्च (भा)। पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार (खजाने) की गिनती और लिस्ट बनाने की प्रक्रिया 48 साल बाद गत दिवस से शुरू हो गई। ‘रत्न भंडार’ भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के कीमती आभूषणों का खजाना है। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के अनुसार यह काम तय शुभ समय (दोपहर 12ः09 से 1ः45 बजे के बीच) में शुरू किया गया। इसमें केवल अधिकृत लोगों को ही प्रवेश दिया गया। इस प्रक्रिया से मंदिर की हर दिन की पूजा-पाठ पर कोई असर नहीं पड़ेगा। श्रद्धालुओं को बाहर के बैरिकेड (बाहर कथा) से दर्शन की अनुमति है, जबकि अंदर वाले हिस्से (भीतर कथा) में इस दौरान प्रवेश बंद रखा गया है।
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति के बनाए गए नियमों के मुताबिक पहले रोज इस्तेमाल होने वाले गहनों की गिनती होगी, फिर रत्न भंडार के बाहरी कक्ष और अंत में अंदरूनी कक्ष को खोला जाएगा। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाधी ने कहा कि पहले दिन कीमती वस्तुओं की गिनती, वजन, वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी और 3डी मैपिंग छह घंटे चली। उन्होंने कहा कि अधिकृत कर्मचारियों ने सुबह लगभग 11ः30 बजे पारंपरिक धोती और गमछा पहनकर मंदिर में प्रवेश किया।
गिनती का कार्य ठीक 12ः12 बजे शुरू हुआ और शाम लगभग 6ः15 बजे तक चला। उन्होंने कहा कि पूरी इन्वेंट्री प्रक्रिया एक मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में की गई और इसकी वीडियोग्राफी भी की गई।
इससे पहले 13 मई से 23 जुलाई 1978 में हुई गिनती में 454 सोने-मिश्रित वस्तुएं (128.38 किलो), 293 चांदी की वस्तुएं (221.53 किलो) और कई कीमती रत्न दर्ज किए गए थे।
अधिकारियों ने कहा कि इस बार आधुनिक तकनीक की मदद से यह काम जल्दी पूरा किया जाएगा। दो रत्न विशेषज्ञ (जेमोलॉजिस्ट) पहचान में मदद कर रहे हैं और हर वस्तु की डिजिटल फोटो ली जा रही है।
सोने के गहनों को पीले कपड़े में, चांदी को सफेद कपड़े में और अन्य वस्तुओं को लाल कपड़े में लपेटकर छह खास बक्सों में रखा जा रहा है। मंदिर के सेवकों, बैंक अधिकारियों, रत्न विशेषज्ञों और आरबीआई के प्रतिनिधियों ने गिनती की प्रक्रिया में भाग लिया।
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