वर्तमान समय में मीडिया में कई स्तर से यह खबरें पढ़ने सुनने को मिल रही हैं कि बेरोजगारी समाप्ति के लिए सरकार प्रभावी कदम उठा रही है और फला मंत्रालय के तहत इतनी नौकरी दी गई। कौशल विकास योजना के तहत इतने लोगों को काम मिला। दूसरी तरफ श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के द्वारा जारी एक रिपोर्ट में जानकारी सामने आई कि बेरोजगारी दल छह माह के शीर्ष पर पहुंच गई है। एक खबर के अनुसार देश में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के लिए बेरोजगारी दर बढ़कर अप्रैल महीने में 5.2 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो छह महीने का उच्च स्तर है। शुक्रवार को जारी निश्चित अवधि पर होने वाले श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) रिपोर्ट से यह जानकारी मिली। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की तरफ से जारी पीएलएफएस मासिक बुलेटिन के मुताबिक, देश में बेरोजगारी दर का पिछला उच्च स्तर अक्टूबर 2025 में भी 5.2 प्रतिशत दर्ज किया गया था। बेरोजगारी दर मार्च, 2026 और अप्रैल, 2025 दोनों महीनों में 5.1 प्रतिशत पर रही थी। अगर सार्वजनिक रुप से इस बारे में दावे किए जा रहे हैं तो झूठ कौन बोल रहा है यह स्पष्ट होना चाहिए। या सिर्फ कागजी खानापूर्ति में नौकरियां मिल रही हैं। अगर ऐसा नहीं तो फिर यह फर्क क्यों आ रहा है। वर्तमान समय में पाठक काफी जागरुक हैं भले ही कुछ मुददों पर उसकी समझ में कुछ ना आ रहा हो लेकिन ऐसे सर्वेक्षण पढ़कर उसके द्वारा यह राय बनाने की बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि कोई ना कोई तो पैतरेबाजी कर ही रहा है लेकिन यह परिस्थितियां सत्ताधारी दल के लिए काफी कष्टदायक हो सकती हैं अगर विपक्षी दल ऐसे आंकड़ों को मुददा बनाने लगे तो। मेरा मानना है कि समाज में सही स्थिति का ज्ञान हो और सही खबर आम आदमी को मिले इसलिए केंद्र सरकार को इस संदर्भ में व्यापक कदम उठाने चाहिए क्योंकि अगर रोजगार दिया जा रहा है तो ऐसे सर्वेक्षण कैसे सामने आ रहे हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि स्वतंत्रता के नाम पर किसी सोच के तहत यह सर्वेक्षण हो रहे हो या नौकरशाह आंकड़ेबाजी रोजगार देने के बारे में कर रहे हों। इस सब पर प्रमुख रुप से संज्ञान लिया जाना चाहिए।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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