यूपी के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में यूनिफॉर्म पहनना अनिवार्य किया गया है। महामहिम राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के द्वारा दिए गए निर्देशों को २४ घंटे में उच्च शिक्षा विभाग ने लागू करने का आदेश जारी कर दिया। इस संबंध में उच्च शिक्षामंत्री योगेंद्र उपाध्याय का कहना है कि विवि और कॉलेजों में अब ड्रेस कोड लागू होगा। प्रत्येक संस्थान की एक यूनिफार्म होगी अैर उसे सभी छात्र पहनेंगे। इससे छात्रों के बीच ऊंच नीच का भेदभाव समाप्त होगा इसलिए ड्रेस कोड अनिवार्य किया गया है। उनका मानना हेै कि एकसमान ड्रेस से जो हीनभावना उत्पन्न होती है वो समाप्त होगी और छात्रों में अनुशासन पैदा होगा। मेरा मानना है कि महामहिम राज्यपाल द्वारा जारी निर्देशों से छात्रों में असमानता खत्म होगी और उनमें किसी प्रकार की भावनाएं पैदा नहंीं होगी। इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि अनुशासन और संस्कार भी मजबूत होंगे क्योंकि इससे विचारधारा में एकता की बात से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन राज्यपाल का यह निर्णय ऊपर दिए गए बिंदुओं के अनुकूल होगा मगर सवाल उठता है कि उच्च शिक्षा प्राप्त कर काबिल बनने का सपना देखने वाला छात्र और उसके परिजन शायद ड्रेस कोड का पालन करने की इच्छा रखते हुए भी अलग से स्कूल के लिए वस्त्र जो ड्रेस कोड से मिलते हो प्राप्त नहीं कर पाएंगे क्योंकि कितने ही परिवारों में हमेशा आर्थिक साधनों का अभाव रहा है। और जी तोड़ मेहनत के बाद परिवार के पालन पोषण मुश्किल से हो पाता है। कितने की परिवारों के बच्चे दो जोड़ी कपडों में ही उच्च शिक्ष प्राप्त कर लेते हैँ। ऐसे में ड्रेस बनवाना इनके लिए कष्टदायक हो सकता है। इसलिए इसे ध्यान रखते हुए महामहिम राज्यपाल के निर्देश लागू हों लेकिन सरकार जिस प्रकार स्कूल में भोजन उपलब्ध कराती हैं उसी तरीके से उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों को साल में दो जोड़ी ड्रेस उपलब्ध कराए जो इन्हें बनवाने में सक्षम नहीं है। उच्च शिक्षा मंत्री की यह सोच भी ठीक है कि अलग अलग कपड़े पहनकर आने से सोच में विद्रोह और हीनभावना होने से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन यह भी पक्का है कि अगर बच्चों की सोच अच्छी बनी रहे महामहिम राज्यपाल के निर्देश लागू हो यह जरुरी है। इस मामले में प्राथमिकता से आर्थिक रुप से कमजोर छात्रों को ड्रेस के साथ जूते मोजे भी उपलब्ध कराए जाएं क्योंकि जितना मैंने देखा है गरीब तो चप्पल भी मुश् िकल से खरीद पाता है। इसलिए इस निर्देश को लागू कराने के लिए कॉलेजों के छात्रों को ड्रेस जूते मौजे भी उपलब्ध कराएं सरकारी खर्च पर क्योंकि सरकार अनेक सुविधाएं नौजवानों को देने के लिए प्रयासरत है उसमें यह कार्य भी जोड़ दिया जाए तो विशेष फर्क पड़ने वाला नहीं है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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