पेट्रोल-डीजल की बचत और भविष्य में संभावित कमी को देखते हुए पीएम मोदी द्वारा मंत्रियों और नेताओं व अफसरों के काफिले में चलने वाली गाड़ियों की संख्या कम करने के आहवान का अच्छा खासा असर नजर आ रहा है। क्योंकि एक जिले में भाजपा किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष के काफिले में १२० वाहन शामिल होने की खबर पढ़ने को मिली जो इस बात का प्रतीक है कि किस प्रकार से मंत्री और पार्टी पदाधिकारी आदि पेट्रोल-डीजल का दुरुपयोग कर रहे हैँ लेकिन आज मिली खबरों से पता चला कि पीएम के काफिले में अब सिर्फ दो गाड़िया रहेंगी। अमित शाह, र ाजनाथ सिंह व जेपी नडडा ने भी अपने काफिले की आधी गाड़ियां हटा दी। हरियाणा के सीएम ने घोषणा की कि वह एक दिन बिना वाहन के चलेंगे तो बिहार के सीएम सम्राट चौधरी इलेक्ट्रिक कार से चले। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी घोषणा की है कि सप्ताह में एक दिन सार्वजनिक वाहन से चलेंगे मंत्री। इस क्रम में विधानसभा समितियों का भ्रमण स्थगित कर दिया गया है। भाजपा के अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपने काफिले की गाड़ियों में कटौती की तो यूपी के सीएम योगी के काफिले में दो कार व डिप्टी सीएम की फ्लीट आधी हो गई। इसी तरह ५० कर्मचारियों वाले संस्थान में वर्क फ्रॉम होम की नीति तैयार की जा रही है। बिहार आंध्र प्रदेश उडीसा मध्य प्रदेश महाराष्ट्र आंध्र प्रदेश, में भी सकारात्मक निर्णय लिए गए हैं। यूपी में कई एमएलसी और मंत्री वाहनों में कटौती करने का निर्णय ले चुके हैं और मेट्रो रिक्शा या दोपहिया वाहनों से अपने कार्यालय जाने की घोषणा कर रहे हैं। अब विधायक और एमएलसी भी स्कूटी और ई रिक्शा से विकास भवन पहुंच रहे हैं। मंत्री सोमेंद्र तोमर ने अपनी काफिले में गाड़ियां कम करने की घोषणा की तो धमेंद्र भारद्वाज ई रिक्शा से विकास भवन पहुंचे। भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष इलेक्ट्रिक स्कूटर से चल रहे हैं तो अफसरों को भी अपने फ्लीट में एक गाड़ी रखने की बात सामने आई है। मुजफ्फरनगर के जिला पंचायत अध्यक्ष ने अपनी कार छोड़कर रिक्शा से सफर किया। यह सब आवश्यक है और सुर्खियों में रहने तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसका ईमानदारी से पालन पेट्रोल-डीजल की समस्या से निजात दिला सकता है। लेकिन मेरा मानना है कि पीएम मोदी के काफिले में केवल दो गाड़ियों का प्रस्ताव और निर्णय सही नहीं है। दुनिया के अपने समकक्ष नेताओं में लोकप्रियता में शुमार और आम नागरिकों की भावनाओं से जुड़े प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा सबसे अहम है। मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री जी रक्षामंत्री राजनाथ सिंह गृहमंत्री अमित शाह के काफिलों में वाहनों की संख्या कम तो हो लेकिन सुरक्षाकर्मियों को ले जाने वाले वाहनों में कमी ना की जाए। जो नेता या कार्यकर्ता साथ चलते हैं उन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया जाए क्योंकि जब प्रदेश की राजधानी में शपथ समारोह स्थगित हो सकते हैं तो कार्यकर्ता नेता कम से कम वाहनों का उपयोग करें तो अच्छा है। वर्तमान में राज्यसभा सदस्य और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ लक्ष्मीकांत वाजपेयी इस मामले में सभी के लिए प्रेरणास्त्रोत हो सकते हैं क्योंकि वो जब कहीं विशेष जाना नहीं होता तो कई दशक से स्कूटर से ही चलते आ रहे हैं चाहे मंत्री रहे हो या प्रदेशाध्यक्ष। जब कहीं दूर जाना होता है तो एक गाड़ी में जाते है। दूसरा वाहन उनके साथ दिखाई नहीं देता। मुझे लगता है कि देश के नेताओं और कार्यकर्ताओं सांसदों व विधायकों को राजनीतिक विचारधारा से हटकर सिर्फ एक गाड़ी का ही उपयोग करना चाहिए। लेकिन कुछ भी हो पीएम मोदी के काफिले में कटौती नहीं हो। अगर इससे पेट्रोल-डीजल की महंगाई बढ़ती है या समस्या होती है तो देशवासी उस महंगाई को भी झेल सकते हैं और पेट्रोल-डीजल की कमी के चलते पैदल या स्कूटर से भी काम चला सकते हैं। पीएम पीएम है हर व्यक्ति को उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता है। वर्तमान में तो प्रधानमंत्री एक जननायक के रुप में भी उभरे हैं क्योंकि तमाम विरोध और अन्य कारणों के बाद भी वो पश्चिम बंगाल में भाजपा को जिताने में सफल रहे। जिन प्रदेशों में चुनाव हुए वहां भाजपा जीती या हारी लेकिन मोदी मैजिक खूब चला।
मध्य प्रदेश के जस्टिस बीडी बंसल ने जनहित में सराहनीय कदम उठाया है। वो अपनी गाड़ी छोड़कर पीएम के आहवान पर साईकिल से हाईकोर्ट पहुंचे तो अपने आप में सीखने की बात है और उससे उदाहरण लेकर अगर न्यायपालिका से संबंध वरिष्ठ अधिकारियों ने इस निर्णय का अनुसरण हुआ तो देश में पेट्रोल-डीजल की समस्या कोई बहुत बड़ा मुददा आसानी से नहीं बन पाएगा।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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