सियोल/नई दिल्ली, 22 जनवरी। दक्षिण कोरिया की एक अदालत ने गत दिवस फैसला सुनाया कि तत्कालीन राष्ट्रपति यून सुक योल द्वारा 2024 में लागू किया गया मार्शल लॉ विद्रोह की श्रेणी में आता है। अदालत ने मामले में संलिप्तता के लिए यून के समय देश के प्रधानमंत्री रहे हान डक-सू को 23 साल की कारावास की सजा सुनाई। पूर्व पीएम हान डक-सू, यून सरकार के पहले अधिकारी बन गए हैं, जिन्हें दिसंबर 2024 में राष्ट्रपति यून द्वारा लगाए गए मार्शल लॉ से जुड़े विद्रोह के आरोपों में दोषी ठहराया गया। फैसले से राष्ट्रपति यून और उनके अन्य सहयोगियों के खिलाफ आने वाले फैसलों की दिशा तय होने की उम्मीद है।
उन पर मॉर्शल लॉ लगाने में मदद करने का आरोप है। कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री को फर्ज याद दिलाते हुए कहा है कि अगर वो चाहते तो देश में इतना बड़ा अनर्थ होने से रोक सकते थे. अब पूर्व पीएम को बगावत मानते हुए कार्रवाई की है।
दक्षिण कोरिया के पूर्व प्रधानमंत्री हान डक-सू ने अपने कार्यकाल में एक ऐसा कांड किया था, जिसकी वजह से अब उनकी जिंदगी के 23 साल जेल की सलाखों के पीछे कटेंगे। ये सजा यून सूक येओल को मॉर्शल लॉ लगाने के आरोप में दी गई है। कोर्ट ने सजा सुनाते हुए कहा है कि डक-सू चाहते तो अनर्थ होने से रोक सकते थे लेकिन उन्होंने मॉर्शल लॉ लगाने में मदद की। इस कदम को कोर्ट ने देशद्रोह माना है. कोर्ट से पूर्व पीएम सजा कम करने की गुहार लगाते रह गए लेकिन उनकी कोई दलील काम नहीं आई।
सोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने पहले फैसले में यह सजा सुनाई है। कोर्ट के फैसले में 3 दिसंबर, 2024 को मार्शल लॉ की घोषणा को एक बगावत माना गया। इस पूरी सुनवाई का लाइव टेलीविजन पर प्रसारण किया गया। स्पेशल वकील चो यून-सुक की टीम ने पूर्व पीएम के लिए 15 साल की सजा मांगी थी। हालांकि, कोर्ट ने इसे बढ़ाते हुए 23 साल कर दिया है। इन आरोपों में बगावत के सरगना को बढ़ावा देना, बगावत में अहम भूमिका निभाना और झूठी गवाही देना शामिल था।
मामले की सुनवाई के दौरान जज ली जिन-ग्वान ने हान को कस्टडी में रखने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि हान सबूतों को नष्ट कर सकते हैं। हान ने यह प्रस्ताव देकर बगावत में हिस्सा लिया कि यून डिक्री घोषित करने से पहले एक कैबिनेट मीटिंग बुलाएं।
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