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    Home»देश»गुरु तेग बहादुर पब्लिक स्कूल को खाली करने का नोटिस, मेरठ कैंट के अन्य विद्यालयों पर भी संकट
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    गुरु तेग बहादुर पब्लिक स्कूल को खाली करने का नोटिस, मेरठ कैंट के अन्य विद्यालयों पर भी संकट

    adminBy adminMay 20, 2026No Comments11 Views
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    मेरठ 20 मई (प्र)। शास्त्रीनगर के सेंट्रल मार्केट में व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ हुई सीलिंग की बड़ी कार्रवाई की आंच अब छावनी (कैंट) क्षेत्र तक पहुंच गई है। रक्षा संपदा अधिकारी विनीत कुमार ने सेंट्रल मार्केट मामले में सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख और आदेशों का हवाला देते हुए छावनी क्षेत्र में अवैध कब्जे और अनाधिकृत निर्माण करने वालों को कड़ा अल्टीमेटम दिया है।
    इसी कड़ी में वेस्ट एंड रोड स्थित प्रतिष्ठित गुरु तेग बहादुर पब्लिक स्कूल को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर परिसर खाली करने और सामान हटाने के निर्देश दिए गए हैं। छावनी प्रशासन के इस कड़े कदम से क्षेत्र के अन्य स्कूल संचालकों में हड़कंप मच गया है। वहीं लगभग दो हजार से अधिक छात्र-छात्राओं के अभिभावकों में अपने बच्चों के भविष्य को लेकर भारी बेचैनी और खलबली है।

    सेंट्रल मार्केट में अवैध निर्माणों के ध्वस्तीकरण और अनाधिकृत कब्जे हटाने की तपिश अब छावनी क्षेत्र तक पहुंच चुकी है। मामला बंगला संख्या 227, जीएलआर सर्वे नंबर 375 स्थित रक्षा भूमि का है, जिस पर अवैध निर्माण एवं अनाधिकृत रूप से स्कूल का संचालन किया जा रहा है।
    रक्षा संपदा अधिकारी ने इस भूमि पर चल रहे गुरु तेग बहादुर पब्लिक स्कूल के अभिभावकों, विद्यार्थियों, शिक्षकों व कर्मचारियों को पूरी स्थिति से आगाह किया है। अधिकारियों के अनुसार इस मामले में सबसे पहले 17 दिसंबर 1994 को वैधानिक नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद जिला न्यायालय ने मिसलेनियस अपील संख्या 284/1994 को 18 जुलाई 1995 को निरस्त कर दिया था। बाद में गुरु तेग बहादुर पब्लिक स्कूल बनाम स्टेट ऑफिसर्स एवं अन्य याचिका को उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा 26 मई 2010 को खारिज कर दिया गया। कानूनी प्रक्रिया के तहत अब 23 अप्रैल से इस मामले में पुनः वैधानिक कार्रवाई शुरू की गई है।

    रक्षा संपदा अधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि सार्वजनिक या रक्षा भूमि पर अवैध कब्जे व अनाधिकृत निर्माण को किसी भी सूरत में संरक्षण नहीं दिया जा सकता। रक्षा भूमि एक राष्ट्रीय संपत्ति है, जिसकी सुरक्षा सर्वोपरि है।

    एक सप्ताह की मोहलत, विधिक कार्रवाई की चेतावनी
    रक्षा संपदा अधिकारी ने स्कूल प्रबंधन को एक सप्ताह के भीतर स्वेच्छा से परिसर खाली करने के आदेश दिए हैं। नोटिस में साफ चेतावनी दी गई है कि यदि इस तय अवधि में सहयोग नहीं किया गया तो प्रशासन सख्त विधिक व प्रशासनिक (बलपूर्वक) कार्रवाई अमल में लाएगा।

    इस अचानक आए नोटिस के बाद से कैंट क्षेत्र में चल रहे तमाम अन्य स्कूल संचालकों में भी डर का माहौल बन गया है। जीटीबी स्कूल में करीब दो हजार बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जिनके अभिभावक एकाएक स्कूल बंद होने की आशंका और सत्र के बीच में दूसरी जगह एडमिशन की समस्या को लेकर बेहद परेशान हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में छावनी क्षेत्र में संचालित अन्य स्कूलों पर भी संकट के बादल गहरा सकते हैं। स्कूल के प्रधानाचार्य गोपाल दीक्षित का कहना है कि पहले भी नोटिस मिले हैं। इस संबंध में बातचीत की जा रही है।

    सेंट्रल मार्केट में पहले ही सील हो चुके हैं 6 स्कूल और 5 अस्पताल
    उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेशों के अनुपालन में बीते 8 अप्रैल को प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट के छह नामचीन स्कूलों और पांच अस्पतालों को सील कर दिया था। आवास एवं विकास परिषद द्वारा सौंपी गई 44 आवासीय भवनों की सूची के आधार पर यह कार्रवाई की गई थी जिनमें पूर्णतया व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं। इस बड़ी कार्रवाई के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक कटारिया ने सभी अस्पतालों के लाइसेंस भी तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए थे। अब वैसी ही कार्रवाई की आहट कैंट क्षेत्र में भी दिखाई दे रही है।

    शास्त्रीनगर के ये संस्थान किए जा चुके हैं सील
    स्कूल: एमपीजीएस, हैप्पी आवर्स, अमेरिकन किड्स, गुरुकुलम, लिटिल फ्लावर और डीआरएस किड्स स्कूल।
    अस्पताल व सेंटर: डॉ. तिवारी अल्ट्रासाउंड सेंटर, डॉ. अशोक गर्ग नर्सिंग होम, जनप्रिय नर्सिंग होम, सुधा हॉस्पिटल, वर्धमान हॉस्पिटल और सनफोर्ड हॉस्पिटल।

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