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    Home»देश»शिक्षा विभाग दे ध्यान! राष्ट्रपति प्रधानमंत्री और सीएम की बजाय, देशभक्तों और जमीन से उठकर शीर्ष तक पहुंचने वाले महापुरूषों के प्रेरणास्त्रोत प्रसंगों की बजाय पीसीएस के इंटरव्यू में नीले ड्रम के बारे में पूछना कहां तक उचित है
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    शिक्षा विभाग दे ध्यान! राष्ट्रपति प्रधानमंत्री और सीएम की बजाय, देशभक्तों और जमीन से उठकर शीर्ष तक पहुंचने वाले महापुरूषों के प्रेरणास्त्रोत प्रसंगों की बजाय पीसीएस के इंटरव्यू में नीले ड्रम के बारे में पूछना कहां तक उचित है

    adminBy adminFebruary 17, 2026No Comments4 Views
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    पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर पति को मरवाया, पति ने प्रेमिका के साथ षडयंत्र कर पत्नी को मरवा दिया, मां सुपारी देकर बेटे को मरवा रही है और छोटे बच्चों को भी मरवाने में अब लोग झिझक नहीं रहे हैं। ऐसा क्यों है यह तो अब जिम्मेदार और समाज के लोगों को सोचना होगा। मगर मुझे लगता है कि लोकसेवा आयोग की पीसीएस २०२४ की मुख्य परीक्षा में सफल अभ्यार्थियों के लिए जा रहे इंटरव्यू में अन्य बातों के साथ ही सवाल पूछे जा रहे हैं कि नीला ड्रम। इस इंटरव्यू में नीले ड्रम से संबंधित जो सवाल पूछे गए और ऐेसे प्रकरणों की छोटी छोटी खबरें मीडिया में प्रसारित हो रही है मुझे लगता है कि वो भी यह जो घटनाएं अंजाम दी जा रही है उनके लिए जिम्मेदार है। कोई पूछे कि इनसे इनका क्या मतलब तो बदनाम हुए तो क्या हुआ नाम तो होगा वाली कहावत इस पर खरी उतरती है। कुछ साल पहले लखनऊ में राजभवन के पास एक लड़के ने विधायक को गोली मार दी। जब उससे पूछा कि क्या दुश्मनी थी तो उसने कहा कि कोई भी पूछता नहीं सोचा हत्या कर दूंगा तो नाम तो हो जाएगा। इसी प्रकार लगभग तीन दशक पूर्व मेरठ में एक लड़के ने लूट के लिए तीन हत्याएं की लेकिन हाथ २५० रुपये आए तो उसने कहा कि पैसो की जरुरत थी। यह कुछ ऐसी घटनाएं है जो आदमी को उकसाती है कि जब इन लोगों का इतना नाम हो रहा है नीला ड्रम छाया हुआ है तो हमारा भी नाम होगा। बाकी सब ठीक है। क्या होना चाहिए क्या नहीं यह जिसे देखना है वो देखे लेकिन पीसीएस के इंटरव्यू में अभ्यार्थियों से नीले ड्रम के बारे में पूछा जाना मुझे नहीं लगता कि ऐसे प्रकरणों को महिमामंडित किया जाए क्योंकि ऐसे ही प्रकरण आगे चलकर किसी को अपराधी बनने पर मजबूर कर देते हैं। देश के इतिहास में बहादुरों की जीवनी पढ़़ने से देशभक्ति समाजहित के लिए र्प्रेरणा मिलती है लेकिन हम उनके संदर्भ में ना पूछकर नीले ड्रम जैसे प्रकरणों को क्यों बढ़ावा दे रहे हैं इसके लिए शिक्षा मंत्रालय को ध्यान देना चाहिए। क्योंकि सवाल पूछने हैं तो राष्ट्रपति कहां से शुरुआत कर इस पद तक पहुंचीं। प्रधानमंत्री ने जीवन में कितने संघर्ष किए। यूपी के सीएम उत्तराखंड के एक छोटे से गांव से निकलकर उप्र के सीएम बन गए ऐसे अनेको उदाहरण देखने को मिल जाएंगे। अगर हम अभ्यार्थियों से उनके बारे में पूछे तो वह देशहित में होगा नीला ड्रम तो नहीं।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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