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    Home»देश»हनी ट्रैप जैसे आरोप लगाने वालों से घबराएं नहीं, अगर आप गलत नहीं है तो खुलकर अपनी बात कहो, समाज क्या कहेगा इससे कुछ नहीं होता है
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    हनी ट्रैप जैसे आरोप लगाने वालों से घबराएं नहीं, अगर आप गलत नहीं है तो खुलकर अपनी बात कहो, समाज क्या कहेगा इससे कुछ नहीं होता है

    adminBy adminMay 15, 2026No Comments5 Views
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    कभी मीटू और कभी लिव इन रिलेशन और हनी ट्रैप जैसे मामले अब काफी पढ़ने सुनने को मिलने लगे हैं। इनसे संबंध खबरें पढ़कर साफ होता है कि ऐसे मामलों में फंसाने वाले गिरोहबंद और गैर ही नहीं अपने भी होते हैं। आज एक खबर पढ़ी कि रामपुर के एक थाने में तैनात दारोगा नीरज कुमार द्वारा अपने छोटे भाई को जमीन के चक्कर में हनी ट्रैप में फंसाने का मुकदमा महिला और उसके सहयोगियों से मिलकर कराया गया। बाद में राकेश ने इस बारे में शिकायत की तो पता चला कि छोटे भाई की जमीन हड़पने केलिए दारोगा भाई ने यह षडयंत्र रचा था। एसपी सिटी अभिषेक प्रताप अजय ने उन्हें सस्पेंड तो कर दिया और हनी ट्रैप में फंसाने वाली महिला और उसके सहयोगी भी पकड़ में आ गए।
    दूसरे मामले में मेरठ के थाना परतापुर क्षेत्र के एक स्कूल के प्रधानाचार्य पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर महिला से दुष्कर्म करने और अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया गया। दो माह बाद जब प्रधानाचार्य ने भी इसके खिलाफ हनी ट्रैप का मुकदमा कराया तो जांच की अवधि में आने की बात कही जा रही है। जहां तक लिव इन रिलेशन की बात है तो इस बारे में अदालत द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए जा रहे हैं क्योंकि कई बार पढ़ा कि लिव इन में रहते हुए दुष्कर्म की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए आरोप सही ना पाए जाने पर रिपोर्ट लिखाने वाले पर भी कार्रवाई हुई। मैं यह नहीं कहता कि सभी मामले झूठे होते हैं लेकिन कुछ वर्ष पहले दिल्ली की एक टीचर और उसके प्रेमी से संबंध की घटना पढ़ने को मिली जिसमें पुरुष कई माह की सजा काट आया और बाद में पता चला कि महिला ने अपने पति के डर से उसे फंसा दिया। वर्तमान में तो अब गूगल पर ऐसे ऐसे आधुनिक व्यवस्थाएं उपलब्ध हो गई हैं जिसके इस्तेमाल से आप किसी को भी निर्वस्त्र या एक साथ सोते हुए अथवा अन्य प्रकार से दिखाकर आरोप लगा सकते हैं। कुछ वर्ष पहले की बात है एक सीनियर आईएएस ने एक चित्र को देखकर कहा कि देखों क्या जमाना आ गया है तो वहां मौजूद एक पत्रकार ने कहा कि यह फर्जी है तो आईएएस बोले ऐसा नहीं हो सकता तो पत्रकार ने आईएएस के चित्र को एक अर्धनग्न महिला के चित्र पर लगाकर सड़क पर नाचते हुए लगा दिया और कोई इसे झूठ नहीं बता सका था। ऐसे ही पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी भजनलाल के बेटे की शादी में विरोधियों ने आरोप लगाए और उन्होंने खुलेआम जवाब दिया कि अब ऐसी तकनीक विकसित हो गई है जो मुझे किसी के साथ सोते या नाचते दिखा सकती है। इसलिए मुझे इसका जवाब नहीं देना। अब दुनिया में कब क्या हो जाए कोई कुछ नहीं कह सकता। समय आ गया है कि महिला हो या पुरुष झूठे आरोप लगते हैंं तो घबराना छोड़ कानूनी रुप से उसका मुकाबला किया जाए। कौन क्या कहेगा इससे कुछ होने वाला नहीं है क्योंकि यहां तो कुछ ना कुछ कहना ही है। एक फिल्मी गाना है खूब पियेंगे हम ठर्रा हो या रम गम हो या खुशी हमें तो पीने का बहाना चाहिए। समाज में कुछ ऐसे लोग होतेहै जिन्हें लोगों की इज्जत उछालने का मौका मिलना चाहिए और उनका मौखिक पुराण शुरु हो जाता है। ऐसे मामलों में बड़े लोगो की भी खबरें आती है लेकिन खुलने पर पता चल ता है कि दबाव बनाने के लिए भी ऐसे आरोप लगते हैँ।
    अगर कहीं किसी के साथ जबरदस्ती या गुमराह कर हनी ट्रैप जैसी घटना उत्पन्न होती है तो उसे अपनी बात आगे बढ़कर कहनी चाहिए और न्याय भी मिलना चाहिए लेकिन यही बात जिस पर आरोप लग रहे हैँ उसके बारे में भी कही जा सकती है कि अगर कोई फंसा रहा है कारण कुछ भी हो तो कानूनी तौर पर उसका सामना किया जाए। न्याय प्रक्रिया में बड़ी ताकत हैं और अदालतों के फैसलों से कई स्थिति स्पष्ट होती जा रही है। पिछले दिनो दो तीन सफेदपोश लोगों पर एक लड़की ने आरोप लगाया जो सही नहीं उतरा और वो बरी हो गए। इसी प्रकार कई साल पहले उत्तर प्रदेश सरकार के एक मंत्री पर एक महिला ने दुष्कर्म के आरोप लगाए लेकिन जांच में वह सही नहीं पाए गए। पता चला कि वह नई तकनीकी का कमाल था। मेरा मानना है कि महिला हो या पुरुष अगर वो सही है तो उसे अपनी बात पर डटे रहकर लंबे समय तक भी न्याय पाने के लिए लड़ना चाहिए। मगर किसी के कहने या कुछ लाभ उठाने की मंशा से अगर आरोप लगाए जा रहे हैं तो यह कह सकते हैं कि न्याय पाने में देर जरुर लग सकती है मगर इंसाफ निर्दोष को जरुर मिलेगा। पिछले दिनों एक किस्सा सुना कि एक फैक्ट्री में एक लड़की काम करती थी। कपड़ा फैक्ट्री का मालिक बाल बच्चो वाला था। आवश्यकता पड़ने पर उसने लड़की की मदद की और बाद में पैसे वापस न करने पड़े उसने दुष्कर्म होने की बात कहकर डरा दिया और मालिक भी इस वजह से शांत हो गया। अब किसी से छिपा नहीं है कि देनदार जो कर्ज लेता है अगर उसकी फितरत खराब है तो वो पैसे ना लौटाने के लिए कई तरह के केस बनाने सें नहीं चूकता। मेरठ के प्रथम मेयर अरुण जैन के साथ भी ऐसा ही हुआ। कितने ही किस्से और मामले ऐसे हैं जो उधार ना देने और जबरदस्ती पैसा लेने के मामले में इज्जत का डर दिखाकर हर उम्र के लोगों को बदनाम करने की कोशिशें खूब होती हैं। मैं इसके लिए किसी पुरुष या महिला को देाषी नहीं देता सभी जगह ऐसी फितरत वाले लोग मोजूद हैं। कहने का आश्य है कि अगर कोई झूठा फंसा रहा है तो समाज में अपनी बात रखने और कोर्ट में जाने पर देर नहीं करनी चाहिए। क्योंकि अब वो समय नहीं रहा कि जितने काले सब मेरे बाप के साले। अब समय बदल रहा है काले बहनोई भी बन रहे हैं। किसी की भी गलत बात नहीं माननी चाहिए। अगर कोई बात लोग उड़ाते भी हैं तो अपनी बात भी पूरी निर्भिकता से सामने रखे लेकिन बेईज्जती के डर से ऐसा फैसला ना लें जिससे परिवार को जीवनभर का दुख झेलना पडे। अगर कोई ऐसे आरोप लगाता है तो इससे संबंध घटनाओं का अवलोकन कर सोशल मीडिया के माध्यम से या सामाजिक संगठनों की सहायता लेकर घटनाओं के परिणामों का हवाला देकर अपनी स्थिति स्पष्ट कीजिए। जमाना बहुत खराब है। यहां बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना वाले लोग सड़कों पर नाचने के लिए घूम रहे हैं। गलत होने पर अपनी स्थिति घबराकर कमजोर ना करे और आरोप लगाने वाले की कमियां समाज को बताने में भी पीछे नहीं रहना चाहिए। कानून आपके साथ है। भारत रत्न डॉ भीमराव अम्बेडकर ने जो संविधान तैयार किया उसमें हर व्यक्ति को न्याय दिलाने की व्यवस्था है। और यह सभी जानते हैं कि दस दोषी भले बच जाएं लेकिन एक निर्दोष को सजा नहीं मिलनी चाहिए। इसलिए घबराओ नहीं आरोप लगाने वाला कोई भी हो आप सही है तो कोई आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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