Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • हंतावायरस क्रूज शिप से 12 देशों में पहुंचा
    • बांग्लादेश के खिलाफ पहले टेस्ट से बाहर बाबर आजम
    • समयानुकुल और पात्रों को न्याय दिलाने में सक्षम है सरकारी नौकरियों में अस्थायी नियुक्तियां रोकने से संबंध सुप्रीम कोर्ट का फैसला
    • विश्वव्यापी मानव सेवा से जुड़े रेडक्रास सोसायटी के सदस्यों को सक्रिय और इससे उददेश्यों की पूर्ति हेतु किया जाए जागरूक
    • दस तोले सोने का हार माता बज्रेश्वरी के दरबार में किया भेंट
    • संजय दत्त की ‘आखिरी सवाल’ की नई तारीख का हुआ ऐलान
    • प्रियंका चोपड़ा के इंस्टाग्राम पर घटे 11,45,124 फॉलोअर्स
    • अमरीकी अदालत ने रद्द किया टैरिफ, ट्रंप ने दी जजों को धमकी
    Facebook Instagram X (Twitter) YouTube
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Demo
    • न्यूज़
    • लेटेस्ट
    • देश
    • मौसम
    • स्पोर्ट्स
    • सेहत
    • टेक्नोलॉजी
    • एंटरटेनमेंट
    • ऑटो
    • चुनाव
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Home»देश»यूपी में अपराध राष्ट्रीय औसत से कम, देश में 18 वें स्थान पर
    देश

    यूपी में अपराध राष्ट्रीय औसत से कम, देश में 18 वें स्थान पर

    adminBy adminMay 8, 2026No Comments4 Views
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn WhatsApp Reddit Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    लखनऊ 08 मई। यूपी अपराध मुक्त प्रदेश की दिशा में आगे बढ़ा है। वर्ष 2024 में प्रदेश में राष्ट्रीय औसत की तुलना में कम अपराध हुए नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की वर्ष 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक देश भर के औसत 252.3 फीसदी के मुकाबले यूपी में 180.2 फीसदी अपराध हुए। यह राष्ट्रीय औसत से 28.5 फीसदी कम है।
    इसके अलावा जनसंख्या के आधार पर देश भर के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की तुलना में यूपी अपराधों के मामले में 2023 के 24वें स्थान के घटकर 18वें स्थान पर आ गया है।

    रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2024 में आईपीएस और बीएनएस के तहत यूपी में कुल 4,30,552 अपराध दर्ज किए गए अपराध जबकि वर्ष 2023 में इसकी संख्या हत्या 4,28,794 और वर्ष 2022 में अपहरण 4,01,787 थी। वर्ष 2024 में दर्ज मामलों में से 76.7 फीसदी में अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया, जो राष्ट्रीय औसत 75.6 फीसदी से ज्यादा है। इससे स्पष्ट है कि प्रदेश पुलिस ने तीन-चौथाई से अधिक मामलों में आरोप पत्र दाखिल करने में तत्परता दिखाई।

    खास बात यह है कि चुनावी वर्ष के दौरान 2024 में प्रदेश में बवाल के 2610 मामले तो दर्ज किए गए, लेकिन कोई सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ। इस तरह औद्योगिक राजनीतिक और जातियों के बीच संघर्ष की घटना भी नहीं हुई।

    एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, हत्या, दुष्कर्म और महिलाओं के विरुद्ध अपराध में भी उत्तर प्रदेश की स्थिति राष्ट्रीय औसत से बेहतर रही है। उत्तर प्रदेश में हत्या की अपराध दर 1.3 रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 1.9 है। इस श्रेणी में राज्य 29वें स्थान पर रहा।

    वहीं झारखंड की दर 3.7 और छत्तीसगढ़ 3.3 की दर के साथ चिंताजनक रही। इसी प्रकार दुष्कर्म के मामलों में यूपी की अपराध दर 2.8 रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 4.3 है। इस श्रेणी में राज्य 24वें स्थान पर रहा। चंडीगढ़ की दर 16.6, गोवा की 13.3 और राजस्थान की दर 12.2 रही। इसी प्रकार महिलाओं के खिलाफ अपराध की कुल दर उत्तर प्रदेश में 58.0 रही, जो राष्ट्रीय औसत 64.6 से कम है।

    इस श्रेणी में राज्य 17वें स्थान पर रहा। दिल्ली की दर 130.7 और तेलंगाना की दर 128.6 रही। बच्चों के खिलाफ अपराध के मामलों में यूपी की अपराध दर 22.1 रही, जो राष्ट्रीय औसत 42.3 से कम है। इस श्रेणी में राज्य 27वें स्थान पर रहा। पाक्सो अधिनियम के तहत अपराध दर उत्तर प्रदेश में 9.5 रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 15.6 है। इस श्रेणी में राज्य 23वें स्थान पर रहा। साइबर अपराध की दर भी यूपी में 4.6 रही, जो राष्ट्रीय औसत 7.3 से कम है। इस श्रेणी में तेलंगाना की दर 71.1 के साथ सबसे अधिक रही।

    ज्यादा एफआइआर दर्ज होना जवाबदेह पुलिसिंग का संकेत
    डीजीपीडीजीपी राजीव कृष्ण ने राज्य में अधिक आपराधिक मामलों के पंजीकरण को लेकर कहा कि ज्यादा एफआइआर दर्ज होना नकारात्मक संकेत नहीं, बल्कि अधिक संवेदनशील और पारदर्शी पुलिस व्यवस्था का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यूपी पुलिस डिजिटल प्लेटफार्म पर मिलने वाली छोटी से छोटी शिकायत का संज्ञान लेती है। ज्यादा पंजीकरण का मतलब है कि पुलिस ज्यादा सुलभ, जवाबदेह और पारदर्शी हुई है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश की कुल अपराध दर वर्ष 2023 की दर 181.3 से घटकर 2024 में 180.2 हो गई है। अपराध दर ही अपराधों की तुलना का वैज्ञानिक आधार है।

    उत्तर प्रदेश में वर्ष 2024 के दौरान महिलाओं के खिलाफ अपराध, डकैती, लूट और चोरी जैसे कई प्रमुख अपराधों में गिरावट दर्ज की गई है। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के तीन वर्षीय तुलनात्मक आंकड़ों ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार की तस्वीर पेश की है।

    रिपोर्ट के अनुसार अपहरण के मामलों में भी कमी आई है। वर्ष 2023 में दर्ज 14,272 मामलों की तुलना में 2024 में यह संख्या घटकर 5306 रह गई, जो 62.8 प्रतिशत की गिरावट है। वर्ष 2022 की तुलना में इसमें 64.4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। महिलाओं के विरुद्ध हुए अपराधों में अपराधियों को सजा दिलाने के मामले में उत्तर प्रदेश आगे रहा है।

    वर्ष 2024 में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में उत्तर प्रदेश की दोषसिद्धि दर 76.6 प्रतिशत दर्ज की गई है। वर्ष 2024 में उत्तर प्रदेश की अदालतों में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के कुल 3,52,664 मामले सुनवाई के लिए थे। इनमें से 27,639 मामलों की सुनवाई पूरी हुई और 21,169 मामलों में अपराधियों को सजा सुनाई गई।

    lucknow ncrb-report tazza khabar tazza khabar in hindi uttar-pradesh news yogi-govt
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
    admin

    Related Posts

    हंतावायरस क्रूज शिप से 12 देशों में पहुंचा

    May 8, 2026

    बांग्लादेश के खिलाफ पहले टेस्ट से बाहर बाबर आजम

    May 8, 2026

    समयानुकुल और पात्रों को न्याय दिलाने में सक्षम है सरकारी नौकरियों में अस्थायी नियुक्तियां रोकने से संबंध सुप्रीम कोर्ट का फैसला

    May 8, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    © 2026 Tazza khabar. All Rights Reserved.
    • Our Staff
    • Advertise

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.