देश में आजादी के बाद से निरंतर भारत को हिंदू राष्ट्र और गौमाता को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग हमेशा होती रही है। अब फर्क इतना है कि पहले हिंदूवादी संगठन इस मांग को किया करते थे मगर अब हिंदू राष्ट्र की बात तो लगभग सभी भूल गए हैं क्योंकि वर्तमान सरकार में शामिल जनप्रतिनिधि भी ऐसी मांग किया करते थे। इसलिए अब किसी का ध्यान दिलाने की आवश्यकता नहीं है शासक खुद जानते हैं लेकिन सनातन धर्म में गाय को मां का दर्जा दिया जाता है। इसके लिए यह कह सकते हैँ कि बच्चा बचपन में मां का दूध पीता है या गाय का क्योंकि वो ही उसे हजम होता है। दूसरी तरफ बड़े संत महात्मा गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग को लेकर आंदोलन चला रहे हैँ लेकिन यह सुखद विषय बनता जा रहा है क्योंकि आजकल तमाम साधु संत अपनी कथाओं में और महानगरों के दौरे का ऐसी मांग करते रहे हैं लेकिन अब जमीयत उलमा ए हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी, अखिल भारतीय कौमी एकता एवं सदभावना समिति के अध्यक्ष जैनुराशिददीन सिददीकी और ईद उल अजहा की तैयारियों के बीच अलवी एजुकेशन वेलफेयर सोसायटी के पदाधिकारियों ने कुर्बानी के दौरान प्रतिबंधित पशु की बलि ना दे तथा गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए और इसी प्रकार कांग्रेस के मुखर सांसद इमरान मसूद द्वारा भी कई बार गाय तो राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की जा रही है। सवाल यह उठता है कि जनप्रतिनिधि भी इस मांग का विरोध नहीं करते हैं कुछ सिरफिरों के अलावा। ऐसे में समय और मौका है और यह ऐसा विषय है जब तक हम जिंदा रहेंगे तब तक याद करेंगे कि फलां शासन में जनता की मांग को गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिया गया था और अब यह मांग साधु संतों की ही नहीं आम आदमी की भी मांग हो गई है। इस बात को सबको भावनाओं को ध्यान में रखते हुए हमारी सरकार को गौमाता को राष्ट्रीय पशु का दर्जा देने में देर नहीं लगानी चाहिए। वैसे भी पूर्ण बहुमत की सरकार है। अगर सोच लेगी तो निर्णय होकर रहेगा और अगर यह हो कि यह फैसले सर्वसम्मिति हो तो संसद में इस पर शक्ति परीक्षण कराना चाहिए । मेरा मानना है कि सभी सांसद इस मांग का समर्थन करेंगे। यह कितना शुभ मौका है कि ईद से एक दिन पहले मुस्लिम विद्वानों द्वारा यह मांग की गई है कि गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिया जाए और प्रतिबंधित पशुओं की बलि देने से बचे। वैसे तो यह कार्य हमारे साधु संत महात्मा कर ही रहे हैं लेकिन एक आम आदमी की सोच के अनुसार मैं भी इसकी मांग करता हूं कि सरकार इसे सर्वमान्य मांग मानकर गौमाता को राष्ट्रीय पशु का दर्जा देने में देर ना करे क्योंकि यह सभी के हित में है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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