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    पेट्रोल डीजल सीएनजी की महंगाई तो नजर आ रही है! शराब, फिल्म का टिकट, होटल में खाना और दोगुने रेट पर बिक रही सब्जी किसी को क्यों दिखाई नहीं दे रही

    adminBy adminMay 28, 2026Updated:May 28, 2026No Comments5 Views
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    किसी भी प्रकार की वस्तुओं का महंगा होना आम आदमी के लिए अच्छी बात नहीं कही जा सकती यह पक्का है। इसलिए इस महीने में चौथी बार पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ने से महंगाई में इजाफा हो चुका है। बीते १२ दिन में पेट्रोल ७.४० पैसे और डीजल ७.५२ पैसे और सीएनजी दो रुपये और महंगी हो गई। इस महंगाई से रिक्शा टैक्सी और सीएनजी से चलने वाले वाहनों के द्वारा अब किराया बढ़ाने से उसकी सीधी मार आम आदमी पर पड़नी है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन यह भी पक्का है कि अपने देश में आलू प्याज टमाटर तेल पेट्रेाल डीजल महंगे होते हैं तो बवाल मचता है और दुहाई दी जाती है कि आम आदमी इस आर्थिक मार को कैसे सहन करेगा। मैं भी महंगाई का सर्मथक नहीं हूं। सरकार को चाहिए की ज्यादा खर्च की भरपाई सरकारी संसाधनों में कमी करके सही की जाए। ना कि आम उपभोक्ता पर महंगाई बढाकर। अब दूसरी तरफ हमारे यहां टीवी चौनलों पर इतने प्रोग्राम आने के बावजूद जब कोई नई फिल्म सिनेमा में लगती है तो उसका टिकट ५० रुपये तक महंगा होने पर कई लोग खरीदते हैं। वहीं शराब के इतने दाम बढ़ जाएं इनकी दुकानों पर सबसे ज्यादा भीड़ आम आदमी की ही होती है और इसके चक्कर में वह अपने घर का बजट बिगाड़ देता है। पहली बार जब गैस पेट्रोल डीजल के दाम बढ़े तो चाय की दुकान व ढाबे वालों ने दस से बीस रुपये बढ़ा दिए। सब जानते हैं कि महंगाई तो हुई लेकिन एक आदमी के खाने में २० रुपये की बढ़ोत्तरी कैसे हो सकती है। अब डीजल पेट्रोल के दाम चौथी बार बढ़ गए तो यह मीडिया की सुर्खियों में है और आम आदमी इसकी चर्चा करते हैं। मैं भी आम आदमी में आता हूं और मुझे भी इसका फर्क पड़ता है। अमेरिका ईरान के बीच जारी विवाद को लेकर जो समस्याएं खड़ी हुई उससे यह चीजें मिलती रहे और उन्हें लाने में ज्यादा खर्च हो मगर मिल तो रही है। इस महंगाई के दौर में कार बाइक खूब दौड़ रही है। राजनीतिक पार्टिया बैलगाडी भैंसा बुग्गी लेकर महंगाई बढ़ना बता रही है। मुझे लगता है कि देशहित में और लोगों को चीजें मिलती रहे इसके लिए अगर पेट्रोल पर दस रुपये भी बढ़े तो इतना बवाल कहीं नहीं आता जितना मीडिया पर दिखाया जाता है। आम आदमी वाहन चलाने में उसी प्रकार मैनेज कर लेता है जिससे महंगाई का खर्च ना बढ़े। सरकार इन वस्तुओं की महंगाई बढ़ाने से बचे लेकिन हर आदमी को समस्याओं से निपट रही मगर आम आदमी को भी देखना चाहिए क्योंकि महंगाई सिर्फ इन पर ही नहीं मॉल में पॉपकॉर्न का पैकेट ५० रुपये पानी की बोतल ५० रुपये में दी जाती है। कपड़े अगर बाजार में सिलवाए जाएं तो २००० में बैठेंगे लेकिन इन मॉलों में दस से १५ हजार के हो जाते हैं इस महंगाई के लिए मीडिया आखिर क्यों नहीं चिल्लाता। क्या वो आम आदमी पर असर नहीं डालती। मेरा मानना है कि हमें पाठकों से सही से अवगत कराना चाहिए कि यह महंगाई क्यों बढ़ी तभी परिस्थितियों से निपटने के लिए हम आदमी को तैयार कर सकते हैं। अब महंगाई का शोर मचाना छोड़ना होगा। पेट्रोल डीजल गैस की महंगाई को लेकर चीखने वाले मंडियों में भी जाएं जहां सब्जी जिस भाव मिलती है मंडी से बाहर आते ही उनकी कीमत ढाई गुना हो जाती है और लोग इसे लेते हैं। महंगाई कोलेकर चर्चा होती है लेकिन बवाल नहीं मचता। कहने का आश्य है कि महंगाई नहीं होनी चाहिए लेकिन आवश्यकता है तो इस मामले में सरकार का सहयोग करना चाहिए। यही देशहित में मुझे लगता है होगा। बाकी जो विपक्षी दल आज इसे लेकर हंगामा मचा रहे हैं उनकी सरकार में भी महंगाई खूब बढ़ती रही है। मैं किसी का समर्थक और विरोधी नहीं हूं लेकिन आम आदमी का मन दुखी हो तो इससे अच्छा है कि इससे निपटने के उपाय खोजे जाएं।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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