लखनऊ 23 जून। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज थाना क्षेत्र स्थित पुरनिया इलाके में उषा मेहता मार्ग पर सोमवार दोपहर एक बहुमंजिला इमारत में बेहद भीषण और हृदयविदारक अग्निकांड हो गया। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 15 छात्र-छात्राओं की दम घुटने और झुलसने से मौत हो चुकी है, जिनमें 5 महिलाएं और 10 पुरुष (ज्यादातर 20 से 30 वर्ष के युवा) शामिल हैं। इस भीषण त्रासदी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेहद गंभीरता से लिया है। देर रात घटनास्थल का जमीनी निरीक्षण करने, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में घायलों व शोकाकुल परिजनों से मुलाकात करने के बाद मुख्यमंत्री ने आपात बैठक बुलाई, जिसमें बड़ी कार्रवाई करते हुए 4 जिम्मेदार अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया और 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया गया है।
अलीगढ़ का मंच छोड़ सीधे लखनऊ रवाना हुए मुख्यमंत्री
जिस समय अलीगंज की बहुमंजिला इमारत में यह दर्दनाक हादसा हुआ, उस समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलीगढ़ के दौरे पर थे और एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। मंच पर ही उन्हें इस दुखद घटना की जानकारी मिली। मुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तुरंत मंच से ही जनता को हादसे के बारे में बताया और अपने आगे के सभी कार्यक्रम निरस्त कर दिए। लखनऊ लैंड करते ही मुख्यमंत्री का काफिला सीधे अलीगंज स्थित घटनास्थल पर पहुंचा और रेस्क्यू ऑपरेशन का जायजा लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों और प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, दोपहर करीब 1:30 बजे इमारत के ग्राउंड फ्लोर और बेसमेंट में संचालित एक पेट शॉप व क्लिनिक में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी। कुछ ही मिनटों में आग ने भयावह रूप लेकर पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। दूसरे फ्लोर पर ‘लर्निंग स्पेस’ नाम की लाइब्रेरी (कोचिंग) और ‘हेड हॉपर स्टूडियो’ (3D आर्ट प्रोडक्शन काम) चल रहा था।
आग और घने धुएं की लपटें देखकर छात्रों में चीख-पुकार मच गई। जान बचाने के लिए कई छात्रों ने खुद को बाथरूम में बंद कर लिया, जहां दम घुटने से उनकी मौत हो गई। वहीं, जयंत नाम का एक बच्चा जान बचाने के लिए पहली मंजिल से कूद गया, जबकि 5 अन्य लोगों ने बिजली व अन्य तारों के सहारे लटककर नीचे उतरकर अपनी जान बचाई। अभी भी कुछ लोगों के फंसे होने की आशंका के चलते राहत कार्य जारी रहा।
घटनास्थल के बाद सीएम योगी सीधे किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज (KGMC) पहुंचे। उन्होंने डॉक्टरों की टीम को घायलों के मुफ्त और उच्च स्तरीय इलाज के सख्त निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने इस हादसे में जान गंवाने वाले मृतकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और उनके परिजनों को ₹5-5 लाख तथा गंभीर रूप से घायलों को ₹50-50 हजार की आर्थिक सहायता देने का तत्काल ऐलान किया।
5 कालिदास मार्ग पर आधी रात को बड़ी कार्रवाई: 4 अधिकारी सस्पेंड
अस्पताल से लौटने के बाद मुख्यमंत्री आवास (5, कालिदास मार्ग) पर आधी रात को एक आपातकालीन उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई। मुख्यमंत्री के कड़े रुख को देखते हुए लापरवाही बरतने के आरोप में निम्नलिखित चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया:
गौरव कुमार – अधिशासी अभियंता (XEN) कलेक्शन, बिजली विभाग, जानकीपुरम
कमलेन्द्र कुमार सिंह – FSSO (फायर विभाग), प्रभारी, इंदिरा नगर
अनिल कुमार – सहायक अभियंता (AE), लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA)
प्रमोद पांडे – अवर अभियंता (JE), लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA)
IAS अमृत अभिजात और ADG प्रवीण कुमार की SIT करेगी जांच
मुख्यमंत्री के निर्देश पर मामले की बारीकी से तकनीकी और आपराधिक जांच के लिए दो सदस्यीय उच्च स्तरीय ‘विशेष जांच दल’ (SIT) का गठन कर दिया गया है। इस तेजतर्रार टीम में शामिल हैं:
अमृत अभिजात (IAS – अपर मुख्य सचिव, धर्मार्थ कार्य, पर्यटन व संस्कृति विभाग)
प्रवीण कुमार (ADG – अपर पुलिस महानिदेशक, लखनऊ जोन)
SIT को बिना किसी ढिलाई के ठीक 7 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपने का कड़ा अल्टीमेटम दिया गया है। लापरवाही के रडार पर आए कई अन्य बड़े अधिकारियों पर भी गाज गिरना तय माना जा रहा है।
सलाखों के पीछे पहुंचे 4 मुख्य अभियुक्त, मुकदमा दर्ज
हादसे के बाद तत्परता दिखाते हुए थाना अलीगंज में मुकदमा अपराध संख्या 115/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 110, 105, 125, 3(5) और उत्तर प्रदेश अग्नि शमन सेवा अधिनियम की धारा 6/10 के तहत 6 नामजद और अन्य के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 4 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनके नाम निम्नलिखित हैं:
रामकृष्ण उपाध्याय (निवासी: सेक्टर D, अलीगंज, लखनऊ)
वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (उम्र: 62 वर्ष, निवासी: मदेयगंज, सीतापुर रोड, लखनऊ)
तूशॉक कृष्णा जायसवाल (उम्र: 31 वर्ष, निवासी: बालागंज, थाना ठाकुरगंज, लखनऊ)
सुरेश कुमार साहू (निवासी: मड़ियांव, लखनऊ)
बिना फायर NOC के बारूद के ढेर पर चल रही थी मौत की बिल्डिंग
इस पूरे अग्निकांड में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि इस तीन मंजिला कमर्शियल इमारत के मालिक ने सुरक्षा मानकों को पूरी तरह ताक पर रख दिया था. बिल्डिंग के मालिक ने फायर एनओसी (No Objection Certificate) के लिए कभी अप्लाई ही नहीं किया था. बिना किसी वैध एनओसी, आपातकालीन निकास (एग्जिट गेट) और अग्नि सुरक्षा उपकरणों के ही इस इमारत में धड़ल्ले से एक लाइब्रेरी, कंप्यूटर कोर्स कोचिंग सेंटर और गेमिंग जोन का संचालन किया जा रहा था, जिसने सीधे तौर पर इस भीषण हादसे को दावत दी.

