जवाली, 23 जून (ता)। पौंग बांध के जलस्तर में लगातार कमी आने के बाद पांडवों द्वारा अज्ञातवास के दौरान निर्मित ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व रखने वाली बाथू की लड़ी के प्राचीन मंदिर लगभग 9 महीने बाद एक बार फिर पानी से बाहर दिखाई देने लगे हैं। लंबे समय तक जलमग्न रहने के बाद मंदिरों का पुनः दर्शन होने से श्रद्धालुओं, स्थानीय लोगों और पर्यटकों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
वर्तमान में मंदिरों के मुख्य ढांचे पानी से बाहर निकल आए हैं, हालांकि मंदिर परिसर के चारों ओर अभी भी पानी मौजूद है। जलस्तर पूरी तरह कम न होने के कारण मंदिर तक सीधा पैदल मार्ग अभी उपलब्ध नहीं हो पाया है। ऐसे में पर्यटक और श्रद्धालु मोटरबोट (नाव) के माध्यम से मंदिर परिसर तक पहुंच रहे हैं और प्राचीन धरोहर के दर्शन कर रहे हैं। मंदिरों के चारों ओर फैला पानी और बीच में उभरकर सामने आए प्राचीन मंदिरों का दृश्य लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
बाथू की लड़ी को हिमाचल प्रदेश की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों में गिना जाता है। मान्यता है कि इन मंदिरों का निर्माण पांडवों द्वारा अपने अज्ञातवास काल के दौरान किया गया था। हर वर्ष पौंग बांध का जलस्तर घटने पर ये मंदिर कुछ महीनों के लिए पानी से बाहर आते हैं और फिर मानसून व जलभराव के दौरान दोबारा जलमग्न हो जाते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिरों के पानी से बाहर आने का दृश्य हमेशा आकर्षण का केंद्र रहता है। बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचकर इस अनोखी विरासत को देखने, फोटोग्राफी करने और धार्मिक आस्था के साथ दर्शन करने का आनंद लेते हैं। क्षेत्र के लोगों ने प्रशासन और पर्यटन विभाग से मांग की है कि यहां आने वाले पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाओं का और विस्तार किया जाए ताकि इस ऐतिहासिक धरोहर को देखने आने वाले लोगों को बेहतर अनुभव मिल सके।
आने वाले दिनों में यदि जलस्तर और कम होता है तो मंदिरों का अधिक हिस्सा भी पूरी तरह दिखाई देने लगेगा, जिससे यहां पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में और बढ़ोतरी होने की संभावना है। प्रशासन की तरफ से पर्यटकों की सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध कर दिए गए हैं। प्रशासन द्वारा एक कर्मी मंदिर में तैनात किया गया है तथा उसके द्वारा लोगों को झील के गहरे पानी में न जाने की नसीहत दी जा रही है।
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