नई दिल्ली 30 मई। भारत को जल्द ही पहला प्लास्टिक नोट मिल सकता है। रिजर्व बैंक आफ इंडिया एक बार फिर से अपने इस सालों पुराने विचार पर आगे बढ़ने जा रहा है। अगर ऐसा हुआ तो यह एक बहुत बड़ा बदलाव होगा। मौजूदा समय में आरबीआई की तरफ से कागज के नोट प्रिंट किए जाते हैं। यह एक खास प्रकार का पेपर होता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रिजर्व बैंक आफ इंडिया की पटना व मुंबई में हुई पिछली दो बोर्ड मीटिंग के दौरान प्लास्टिक नोट्स लाने की चर्चा हुई।
2012 में तत्कालीन सरकार ने पांच शहरों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर प्लास्टिक नोट लाने की तैयारी में थी । तब कुछ तकनीकी चुनौतियों के कारण इस कोशिश को रोकना पड़ा था। अब फिर प्लास्टिक के नोट लाने की चर्चा हो रही है। इसके पीछे दो बड़े कारण हो सकते हैं। पहला लागत है। दूसरा लंबे समय तक के लिए उपयोग में रहे।
पालीमर नोट लाने के पीछे की बड़ी वजह शेल लाइफ भी है। कागज के नोट की शेल लाइफ काफी कम होती है।
आखिर प्लास्टिक के नोट लाने पर विचार क्यों ?
हर वर्ष लाखों की संख्या में नोट खराब हो रहे हैं, जिन्हें चलन से बाहर कर दिया जाता है। इन नोटों के बदले नए नोट छापे जाते हैं जिसकी लागत लगातार बढ़ रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में आरबीआइ का करेंसी नोट छापने वाला खर्च 6,372.8 करोड़ रुपये था, जो 2023-24 में 5,101.4 करोड़ था। इसी तरह, 2024-25 में 23.8 अरब खराब नोट चलन से हटाए गए। वित्त वर्ष 2025-26 में नोटों को छापने की लागत घटकर 4,875 करोड़ रुपये रह गई है। वर्तमान में करीब 60 देश प्लास्टिक बैंक नोट का प्रयोग कर रहे हैं। आस्ट्रेलिया 1998 में पहला देश बना था।
प्लास्टिक नोट की खास बातें
- पालिमर बैंक नोट एक पतली और लचीली प्लास्टिक पर प्रिंट किए जाते हैं
- प्लास्टिक होने के बावजूद यह क्रेडिट या डेबिट कार्ड की तरह सख्त नहीं होते हैं
- पालिमर के यह नोट काफी हल्के होते हैं और इन्हें मोड़ा जा सकता है
- इन नोटों का प्रयोग कागजी मुद्रा की तरह ही किया जा सकता है।
- यह नोट काफी मजबूत हैं और इन्हें लंबे समय तक चलन में रखा जा सकता है
- माइक्रो-आप्टिक होलोग्राम और खास तरह की स्याही के चलते नकल करना काफी मुश्किल है

