गंगानगर स्थित आईआईएमटी विश्वविद्यालय की एमबीए फाइनल ईयर की छात्रा अनु गुप्ता की आत्महत्या को लेकर अभी मामला शांत नहीं हो पा रहा है। छात्रा की मौत पर २० घंटे चले धरने और मृतका के पिता की तहरीर पर आईआईएमटी विश्वविद्यालय प्रशासन पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज हो गया। छात्रावास के निदेशक और दो वार्डन निलंबित कर दिए गए। लेकिन यह कार्रवाई अभी पूरी नहीं समझी जा सकती। क्योंकि बुधवार को कॉलेज के सरोजिनी नायडू गर्ल्स हॉस्टल की तीसरी मंजिल से कूदकर जो छात्रा ने आत्महत्या की वो आसानी से थमने वाला नहीं है। सहारनपुर के ओमकार गुप्ता की बेटी अनु गुप्ता की आत्महत्या पर खबरों के अनुसार मुकदमा भी दर्ज हो गया। दो वार्डन निलंबित कर १३ सदस्यीय जांच कमेटी बनाई गई है। जिसमें ज्यादातर आईआईएमटी विश्वविद्यालय प्रशासन के ही लोग बताए जाते हैं। इस आईआईएमटी विश्वविद्यालय में आए दिन किसी ना किसी हंगामे की घटना होने की खबरें मिलती ही रहती हैं। लेकिन हमेशा थोड़ा शोर शराबा होता और हर छात्र व परिजन मजबूत पृष्ठभूमि के नहीं होते इसलिए विवि प्रशासन मामले को दबा देता है ऐसा छात्रों का कहना है क्योंकि कुछ दिन बाद मीडिया में यह खबरें लुप्त हो जाती है। आज एक व्यक्ति ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि विवि के कुलाधिपति और उनके पुत्र अपने आईआईएमटी विश्वविद्यालय की साख बनाने और उच्च स्तरीय संबंधों को कायम करने के लिए कोई ना कोई ऐसा आयोजन करते रहते हैं जिससे असरदार लोगों के निकट जाने का मौका मिलता रहे। इसी तरह कभी स्थानीय तो कभी प्रदेश व राष्ट्रीय व विदेशी प्रतिनिधियों को बुलाकर बड़ी घोषणाएं की जाती हैं। अब तो चर्चा सुनने को मिलती है कि २०२७ में यूपी विधानसभा के चुनाव में पिता पुत्र सत्ताधारी दल से टिकट प्राप्त करने और चुनाव लड़ने के लिए प्रयास कर रहे हैं। सही गलत तो वो ही जाने लेकिन चर्चाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि इससे पहले आईआईएमटी विश्वविद्यालय के मुखिया अन्य दलों से भी टिकट मांग चुके हैं और किसी ना किसी मामले को लेकर चर्चित बने रहेते हैं। कुछ साल पहले फैशन शो के बवाल के बाद क्या हुआ यह कोई नहीं जान पाया। अब इस आत्महत्या मामले में कुछ ऐसा यह समय ही बताएगा। सूत्रों का कहना है कि वीआईपी को इसलिए बुलाया जाता है कि समय पड़ने पर वो मदद करें। एक बेटी ने आत्महत्या क्यों की यह विषय ज्वलंत है जबकि सरकार बेटी को पढ़ाने केलिए भरपूर व्यवस्थाएं कर रही है फिर भी कोई छात्रा आत्महत्या कर ले तो यह विषय सोचनीय तो है ही। कुछ लोगों का कहना है कि छात्रावास के निदेशक डॉ लखविंदर वार्डन सुमन गर्ग व सुमनलता को निलंबित कर दिया गया है और कॉलेज प्रशासन पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज हो गया है। जांच कमेटी का छात्रा के हित में कोई निर्णय निकलेगा उसे लेकर नागरिक प्रश्न चिन्ह लगा रहे हैं। महिला आयोग की सदस्य मीनाक्षी भराला ने इस मामले में चिंता जताई है। अगर उन्होने प्रयास किया तो यह मामला दब नहीं पाएगा।
देश में अच्छे स्कूल विवि की आवश्यश्कता है क्येांकि शिक्षा के लिए यह जरुरी है मगर यह किसी से छिपा नहीं है कि जो सुविधाएं मिलती है विवि प्रशासन ले लेता है मगर छात्रों को उनका लाभ नहीं मिलता। सरकार निशुल्क शिक्षा की व्यवस्था करती है मगर लोगों को कर्ज लेकर अपने बच्चों की पढ़ाई का खर्च पूरा करना पड़ता है। अपनी गाड़ी पर कुलाधिपति की प्लेट लगाकर समाज में अपनी धमक तो पैदा की जा सकती है मगर छात्रों का भविष्य सुधारा नहीं जा सकता और ना ऐसी घटनाअेां को रोका जा सकता है। नागरिकों का कहना है कि इस प्रकरण की जांच पुलिस प्रशासनिक और न्यायिक अधिकारी से कराई जाए जिससे उसकी जांच पर सवाल ना किया जा सके।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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