मेरठ, 15 मई (ता)। सरधना फ्लाईओवर पर गत रात हुए सड़क हादसे के बाद एक निजी अस्पताल और एंबुलेंस सेवा की लापरवाही ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। बाइक और रिक्शा की भिड़ंत में गंभीर रूप से घायल रिक्शा चालक को डायल 112 पुलिसकर्मी निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां अस्पताल प्रशासन ने उसे भर्ती करने से इंकार कर दिया। इलाज न मिलने से घायल करीब 40 मिनट तक अस्पताल के गेट पर तड़पता रहा और आखिरकार उसकी मौत हो गई।
गत देर रात सरधना फ्लाईओवर पर बाइक और रिक्शा की जोरदार टक्कर हो गई। हादसे में दोनों चालक गंभीर रूप से घायल हो गए। राहगीरों की सूचना पर 112 पीआरवी पहुंची और दोनों को तत्काल एक निजी अस्पताल लेकर गई। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिसकर्मियों के मुताबिक अस्पताल प्रशासन ने बाइक सवार को भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया, लेकिन रिक्शा चालक की हालत गंभीर देखकर उसे भर्ती नहीं किया गया। सिपाही ने डॉक्टरों से कई बार इलाज की अपील की। आरोप है कि डॉक्टरों ने कहा कि उनके यहां दिमाग का डॉक्टर नहीं है, इसे सरकारी अस्पताल ले जाओ। इस दौरान घायल अस्पताल के गेट पर तड़पता रहा। करीब 40 मिनट बाद उसने दम तोड़ दिया।
एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले ने कहा कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। तहरीर मिलने पर जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। लोगों का कहना है कि समय पर इलाज मिलता तो जान बच सकती थी।
उधर अस्पताल के मैनेजर ने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि मेरे संज्ञान में ऐसा कोई मामला नहीं है। हमारे अस्पताल में सभी प्रकार के डॉक्टर उपलब्ध हैं और मरीजों का तत्काल उपचार किया जाता है। अस्पताल के बारे में लगाए गए आरोप गलत हैं।
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