प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की सोना खरीदने से बचने की अपील के बाद यह अपील तथा केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के बयान कि नागरिक घबराएं नहीं देश में पेट्रोल डीजल का पर्याप्त भंडार है। वहीं एक खबर पढ़ने को मिली कि ६० दिन का भंडारण मौजूद है। अगर हम पेट्रोल डीजल के खर्च में कटौती करें तो इस विषय पर देश में कोई समस्या उत्पन्न नहीं होगी। हां यह जरुर है कि पांच रुपये बढ़ सकती है पेट्रोल डीजल की कीमत। अगर ध्यान से देखें तो पड़ोसी देशों में इस समस्या को लेकर हाहाकार मचा हुआ है और कीमतें आसमान को छू रहीं है ऐसे में हमारे देश में पांच रुपये कीमत बढ़ना कोई बड़ी बात नहीं है और जो हम शान दिखाने के लिए बड़ी गाड़ियों में एक आदमी चलता है उस सोच को खत्म कर पेट्रोल डीजल की बचत के लिए नए नए उपाय खोजे तो शायद पांच रुपये कीमत भी ना बढ़ पाए।
इसी दौरान एक बयान पढ़ने को मिला कि अब केंद्रीय मंत्रालय खुद भी पेट्रोल डीजल की खपत कम करेंगे। यह सब पीएम की अपील पर होने की बात सामने आ रही है मगर यह खबर अच्छी है कि सबसे ज्यादा पेट्रोल डीजल की खपत बिना किसी काम के देश में प्रमुख पदों पर विराजमान जनप्रतिनिधि मंत्री और अधिकारी करते हैं। एक के साथ कई गाड़ियां आगे पीछे दौड़ती हैं। अब तो स्थिति यह हो गई है जहां तक प ढ़ने सुनने देखने को मिलता है राजनीतिक दलों के पदाधिकारी पांच सात गाड़ी अपने साथ लेकर चलते हैं। वो ऐसा नहीं करते तो समर्थक उनके पीछे अपनी गाड़ियां दौड़ाते हैं और कई बार किसी मीटिंग में चार अधिकारियों को जाना है तो वो चारों अलग अलग वाहनों से जाते हैं यह भी पेट्रोल डीजल की खपत का विषय है। मेरा मानना है कि सीमा पर सुरक्षा में लगे आर्मी को तो आवश्यकता पड़ने पर पेट्रोल डीजल के खर्च की छूट दी जानी चाहिए लेकिन पुलिस प्रशासनिक अधिकारी जो कई कई वाहन लेकर चलते हैं उन पर सख्ती से रोक लगे और जिस प्रकार से इन चीजों की खपत को ध्यान में रखते हुए कीमतों में बढ़ोत्तरी की संभावना है हमें फिलहाल पीएम की अपील कोरोना जैसे समय जिस तरह से हम बचत करने में लगे थे इस समय भी करनी चाहिए के क्रम में मुझे लगता है कि जितने भी सरकारी गैर सरकारी कार्यालय हैं इनमें एसी कूलर पंखे और जेनरेटरों पर थोड़ी रियायत देकर रोक लगाई जाए क्योंकि सरकारी कार्यालय में खाली समय में भी एसी कूलर चलते रहते हैँ और इसकी पूर्ति बनाने के लिए इनका उपयोग भी किसी ना किसी रुप में होता है और सभी राजनीतिक दलों का केंद्रीय नेतृत्व देशहित में यह संदेश जारी करे कि प्रतिनिधिमंडल के जाने पर कम वाहनों का उपयोग हो और हर गाड़ी में पांच आदमी सफर करें। ऐसा ही आग्रह सरकार को आम आदमी से करना चाहिए। इससे कई देशों में जो कम वाहन उपयोग करने और एक में कई के चलने की व्यवस्थाएं हैं उनसे अपने देश में भी ऐसा हो सकता है।
क्योंकि वर्तमान समय में केंद्र में भाजपा और सहयोगी दलों की सरकार है और ज्यादातर प्रदेशों में भी इसी पार्टी की सरकारें हैं और हाल ही में कुछ जगह इनकी सरकार बनी है जिसे देखकर कह सकते हैं कि आम आदमी पर जो वर्तमान में मोदी मैजिक का असर है और उनकी ओजस्वी वाणी सुनकर लोग उस पर अमल करते हैँ उसे देखकर पीएम और यूपी के सीएम सहित तमाम नेता जो प्रयास कर रहे हैँ उनका असर होगा यह पक्का है। जहां तक सोना ना खरीदने की अपील है तो नागरिकों का मत है कि शादी विवाह और जरुरत से ज्यादा पैसे से सोना खरीदें तो देश को कोई नुकसान होता नजर नहीं आता है। कुल मिलाकर कहने का आश्य है कि अगर राजा के स्तर पर कुछ होता है तो प्रजा उसे आत्मसात करती है को ध्यान में रखकर कहा जा सकता है कि जब केंद्रीय नेतृत्व अपने मंत्रालय में इसकी खपत पर बचत के उपाय कर रहा है तो प्रदेश सरकारें इसका अनुसरण जरुर करेंगी और अपने देश में भी कई बार ऐसा होता नजर आया कि कई लोग शान शौकत के लिए साधनों की बर्बादी करने में नहीं चूकते लेकिन जब वो सामान्य आचरण करते हैं तो नीचे का आदमी अपने आप उस पर चलता है। इसलिए यह कहा जा सकता है कि दुनिया में अपने समकक्षों में शीर्ष पर विराजमान पीएम मोदी की अपील काम करेगी और मंत्रियों से लेकर आम आदमी भी फिजूलखर्ची रोकने का प्रयास जरुर करेगा इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता। इस परिस्थिति में संबंधित विभाग और गृह व कानून मंत्रालय मंत्री नेताओं के साथ कंपनियों के संचालकों को निर्देश दे कि वह पेट्रोल डीजल और बिजली की खपत का आधा करें तो इसे लेकर समस्याएं दूर होंगी और जो कमी है वो दूर हो जाएगी। फिलहाल जनमानस को जिस प्रकार हम कठिन समय में साथ खड़े रहते हैं सरकार के साथ खड़ा रहना चाहिए और विपक्ष को इसे मुददा ना बनाकर इसके समाधान में पीछे नहीं रहना चाहिए।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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