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    Home»देश»13 को शुरू होगा उत्तरी भारत का प्रसिद्ध नौचंदी मेला, इतिहास में दूसरी बार होगा मेला नौचंदी का शुभारम्भ, प्रभारी मंत्री की उपस्थिति मेले की गरिमा और परंपरा कहां तक कायम करेगी
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    13 को शुरू होगा उत्तरी भारत का प्रसिद्ध नौचंदी मेला, इतिहास में दूसरी बार होगा मेला नौचंदी का शुभारम्भ, प्रभारी मंत्री की उपस्थिति मेले की गरिमा और परंपरा कहां तक कायम करेगी

    adminBy adminMay 12, 2026No Comments19 Views
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    उत्तरी भारत का प्रसिद्ध गंगा जमुनी तहजीब और भाईचारे का प्रतीक मेला नौचंदी देर से ही सही शुरू होने का समय शायद आ गया है। क्योंकि रोज रोज तारीख घोषित करने वालों का कहना है कि कल से शुरू होगा नौचंदी मेला। मेरठ के प्रभारी मंत्री धर्मपाल सिंह 13 को करेंगे शुभारम्भ। अगर उद्घाटन और शुभारम्भ में कोई फर्क नहीं है तो शायद इस ऐतिहासिक मेले का पहली बार दो बार में शुभारम्भ होगा क्योंकि परंपरागत रूप से यह मेला होली से एक रविवार छोड़कर दूसरे को हमेशा मेरठ मंडलायुक्त द्वारा उसका उद्घाटन होता रहा है वह बात दूसरी है कि आसपास के जिलों में लगने वाली नुमाइशों के चलते दुकानदार कुछ देर से मेले में पहुंचते थे इसलिए 15 दिन या कभी एक महीना देर से यह शुरू होता था मगर साते आठे नवमी और दशमी को हमेशा मेला पूरे जोरशोर से जारी होता था और श्रद्धालुओं के नवचंडी मंदिर में पूजा करने और मुस्लिम भाईयों द्वारा इबादत के लिए वहां पहुंचते थे और भीड़ इतनी होती थी कि कंधे से कंधा मिलता था।
    इसके अलावा मेरठ के रहने वाले जो दुनिया के विभिन्न देशों में बसे है या जो मेला पहले देख चुके है उनके द्वारा बेसब्री से उन्हें मेले का इंतजार रहता था। परिणाम स्वरूप शहर और जनपद के शायद कुछ ही घर बचते होंगे जिनके रिश्तेदार मेला देखने ना आते हों। इसलिए नौचंदी के साथ साथ मोहल्लो और बाजारों में भी भीड़ रहती थी क्योंकि बाहर से आने वाले अपनी यादें ताजा करने और रिश्तेदारों से मिलने का मौका नहीं चूकते थे।
    कुछ वर्ष पूर्व जब प्रदेश सरकार ने इसे प्रांतीय मेले का दर्जा दिया तो यह उम्मीद बनी थी कि नौचंदी मेला अब पूरे परंपरागत तरीके से हमें देखने को मिलेगा क्योंकि अब स्थानीय नागरिकों के साथ सरकार भी इस मेले में व्यवस्था देखने के लिए खड़ी है।
    मगर इसे हमारा दुर्भाग्य कहें या इस कार्य में लगे लोगों की कोताही यह ऐतिहासिक मेला जो आम आदमी की भावनाओं से जुड़ा है अभी तक तो हमेशा पुराने के मुकाबले नहीं लग पाया इस बार सक्रिय और रचनात्मक सोच वाले जिलाधिकारी डा. वीके सिंह की देखरेख में जिला पंचायत मेला लगाने जा रही है। और इसके अध्यक्ष गौरव चौधरी जो विदेश से आये और पहला ही चुनाव लड़ा तथा जिला पंचायत अध्यक्ष बन गये की सोच के साथ सीडीओ नुपूर गोयल के दिशा-निर्देशों में मजबूती से लगेगा यह उम्मीद की जाती थी कि यह परंपरागत रूप से शुरू होगा जो नहीं हुआ। अब इसमें कहां चूक रही यह तो संबंधित ही जान सकते हैं मगर यह एक अच्छी खबर है जैसा भी जिस हाल में लगेगा कल 13 मई को प्रभारी मंत्री इसका शुभारंभ करेंगे। इसमें भी नागरिकों का कहना है कि लगभग दो माह देर से शुरू होने वाले नौचंदी मेले में वह व्यवस्थाएं नजर नहीं आ रही है जो दिखाई देनी चाहिए इसलिए कहीं इस बार भी यह शुभारम्भ होकर ही ना रह जाये।
    एक जमाना था जब शम्भूदास द्वार से नौचंदी तक पहुंचने के मार्ग में दोनों तरफ लोहे और मिट्टी के घरेलू उपयोग के सामान के साथ-साथ अन्य दुकानें भी लग जाती थी यहां दर्शक नौटंकी और सांग का मजा लेते थे। हापुड़ रोड से तिरंगा गेट में घुसते ही कई विभागों की प्रदर्शनियां दर्शकों के अवलोकनार्थ नजर आती थीं तो पटेल मंडप के पीछे नौचंदी कमेटी के सदस्यों के कैम्प लगे होते थे। और साइड की तरफ मेला कमेटी के अध्यक्ष का शिविर लगता था और यहां आने वाले परिचितों का खूब स्वागत सत्कार तो होता ही था कई विषयों पर गोष्ठियां भी होती नजर आती थीं एक टैंट सभी सुविधाओं से युक्त पत्रकारों का होता था जो अब बीते जमाने की बात हो गयी। पटेल मंडप में जो प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम होते थे अब उस जोश से नजर नहीं आते हैं। गढ़ रोड से इंदिरा गेट से निकलते े ही आगे बढ़ते थे तो नानखताई, हल्वा पराठा आदि की दुकाने नजर आती थीं और साइड में जिला पंचायत की जगह पुलिस और जिला पंचायत की प्रशासनिक अधिकारियों के कैम्प लगते थे जहां स्वागत सत्कार के कार्यक्रम कमेटी के द्वारा किये जाते बताये जाते थे। आगे शहीद द्वार से निकलते ही सुंदर सुंदर दुकानों और दर्शकों से भरा मेला गोकुल की मिठाई की दुकान और नीलम के छोले भठूरे आगे चलकर नौचंदी मंदिर और बाले मियां की मजार पर पूजा और ईबादत करने वालो का आवागमन होता था बच्चे मौत का कुंआ और झूलों के साथ साथ लगे सर्कस का आनंद लेने का मौका नहीं चूकते थे तो कितने ही परिचित पुलिस या मेले में लगी डयूटी से पास का जुगाड़ करने का नहीं चूकते थे पटेल मंडप के एक तरफ नौचंदी का कार्यालय होता था जहां तैयारियों की समीक्षा और बाकी कार्य किये जाते थे तो मोहन द्वार में लगी दूर-दूर से आये उत्पादों की प्रदर्शनी भी उपभोक्ताओं को आकर्षित करती थी लेकिन जितनी बार भी प्रांतीय के रूप में मेला लगा वहां ऐसी उपलब्धियों नजर नहीं आयीं हां आने वाले वहानों से अनाप शनाप वसूली ठेकेदारों द्वारा किये जाने की खबरें खूब सुनने को मिलती है इस बार मेले तक दर्शकों तक पहुंचाने ओर उनकी सुरक्षा की बात भी सामने आयी है अब देखना यह है कि नौचदंी के इतिहास में पहली बार दूसरी बार प्रदेश के प्रभारी मंत्री धर्मपाल जी द्वारा किया जाने वाला मेले का शुभारंभ कितनी पुरानी परंपराओं को कायम करने में सफल होगा यह अभी नहीं कहा जा सकता।

    (प्रस्तुतिः- अंकित बिश्नोई राष्ट्रीय महामंत्री सोशल मीडिया एसोसिएशन एसएमए व पूर्व सदस्य मजीठिया बोर्ड यूपी संपादक पत्रकार)

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