2020 में चीन और भारतीय सेना के जवानों के बीच माहौल गर्म होने के चलते सरकारी ठेकों में चीनी कंपनियों के बोली लगाने पर लगाई गई रोक एक खबर के अनुसार हटाने पर विचार किए जाने की खबर है। बताते हैंं कि दो चीनी बोलीदाता कंपनियों को सरकार की एक समिति के साथ पंजीकरण कराना और राजनीतिक एवं सुरक्षा संबंधी मंजूरी प्राप्त करना आवश्यक था। दूसरी तरफ संघ परिवार हर क्षेत्र में स्वदेशी को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है। इस प्रयास को केंद्र सरकार के कई प्रमुख मंत्रियों व प्रधानमंत्री का भी समर्थन मिल रहा है क्योंकि कई मौकों पर उनके द्वारा स्वदेशी अपनाने की अपील की जा चुकी है। इस सबके बावजूद कुछ लोग व अफसरों द्वारा पुराने प्रतिबंधों को खत्म करने के प्रयास किए जा रहे हैं। होगा क्या यह तो समय बताएगा क्योंकि चर्चा है कि इस प्रयास को अंतिम रूप प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा दिया जाना है। इसलिए जो होगा सही होगा। मगर आम आदमी की निगाह में यह प्रयास स्वदेशी को बढ़ावा देने के चलते सही नहीं कहा जा रहा। बाकी तो राजनीति और व्यवस्था में सरकार को देशहित में निर्णय लेने पड़ते हैं। परिस्थिति के हिसाब से निर्णय लिए जाते हैं। वर्तमान में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जो अनावश्यक रूप से टैरिफ बढ़ाने की बात कर रहे हैं और पड़ोसी देशों में जो स्थिति है उसे ध्यान में रखते जो भी निर्णय सरकार करेगी वो सही होगा लेकिन इतना जरूर होना चाहिए कि स्वदेशी पर जो काम चल रहा है वो प्रभावित ना हो। क्योंकि इससे हर चीज में देशहित की भावना नजर आती है दूसरे बेरोजगार युवकों को काम मिलने में भी बढ़ोत्त्तरी हो रही लगती है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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