किसी को अपशब्द कहना या ऐसी व्यवस्था को बढ़ावा देना सभ्य समाज में उचित नहीं कहा जा सकता। लेकिन इस सबके बाद भी ऐसे मामलों में कार्रवाई का प्रावधान होने के बाद भी ऐसे शब्दों का बखान खूब होने लगा है जो नहीं होना चाहिए। बीते दिनों कांग्रेस के समागम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बहुत कुछ कहा गया। बददुआएं और गालियों का उपयोग किया गया और ऐसे ऐसे शब्द कहे गए जो नहीं कहे जाने चाहिए थे। एक खबर के अनुसार उनके खिलाफ ऐसी ९१ गालियां दी गई जिन्हें लिखा जाना संभव नहीं है। यह किसी एक पार्टी या नेता के द्वारा नहीं किया जा रहा। अगर ध्यान से देखें तो सब एक दूसरे को इसके लिए दोषी तो ठहराते नजर आते हैं लेकिन मौका लगते ही ज्यादातर दलों के नेता वक्त आने पर धड़ल्ले से गलत शब्द का प्रयोग करने लगते हैं। इस बारे में सब एक दूसरे को सलाह भी देते हैं। सभ्यता का अहसास भी कराते हैं और भारतीय संस्कृति में ऐसा नहीं होना चाहिए यह भी बताते हैंं मगर ग्रामीण कहावत लंका में सारे ५२ गज के ही हैं और इस मामले में पीएचडी किसी ने ना की हो लेकिन जीवन में समय समय पर जो शब्द अपने या दूसरों के लिए सुनने को मिले उनका उपयोग करने में बहुत कम लोग गुरेज करते हैं।
हम अपनी भावी पीढ़ी को सिद्धांत और संयम से कार्य करने और आगे बढ़ने की सलाह देते हुए एक सभ्य समाज का निर्माण का भरोसा उनसे लेने में कोई कमी नहीं छोड़ते। मगर अपने आप क्या सीख उन्हें दे रहे हैं इसके लिए आत्म अवलोकन कोई भी करने को तैयार नहीं है। मेरा मानना है कि जो अपशब्द किसी को कहता है वो अपनी जबान गंदी करता है। एक चुप १०० को हराए वाली बात को ध्यान में रखते हुए मेरा मानना है कि कोई क्या कह रहा है क्या नहीं इसे भूलकर हमें सहमति और असहमति पर विचार करने के दौरान इस बात पर विशेष जोर देना चाहिए कि किसी भी समय वैचारिक विरोध बहुत हो सकते हैं हम एक दूसरे को पसंद भी ना करते हो लेकिन ऐसे शब्दों का उपयोग कभी नहीं करना चाहिए जिनकी भरपाई ना हो पाए। एक कहावत बड़ी प्रचलित है कि दीवार में छेद हो जाए तो उसे भरा जा सकता है लेकिन जुबान से निकले बोल कभी वापस नहीं होते और इससे जो मन में खटास पैदा होती है उसकी कसम सारे प्रयास करने के बाद भी किसी भी रूप में दूर नहीं हो पाती। इसलिए बोलचाल में संयम जरूर रखा जाए जिससे भविष्य में दुआ सलाम की व्यवस्था बनी रहे।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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