लखनऊ, 06 फरवरी। यूपी सरकार का 11 फरवरी को आने वाला बजट 9 लाख करोड़ के आसपास हो सकता है। सरकार का मुख्य ध्यान प्रदेश के विकास और आम लोगों की सुविधाओं पर रहेगा। खासतौर पर सड़क, पुल, शहरों के विकास, सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी ढांचे पर बड़ा खर्च किए जाने की उम्मीद है। पिछले वित्तीय वर्ष में यूपी का बजट करीब 8.08 लाख करोड़ रुपये था। इसमें जनकल्याण से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक सरकार युवाओं के रोजगार, किसानों की मदद और गरीब व जरूरतमंद वर्ग के लिए चल रही योजनाओं में अच्छी रकम दी जा सकती है। के लिए अच्छी खासी रकम रख सकती है। अनुमान है कि कुल बजट का करीब 25 प्रतिशत हिस्सा इंफ्रास्ट्रक्चर, 15 प्रतिशत शिक्षा, 12 प्रतिशत कृषि, 8 प्रतिशत स्वास्थ्य और 5 प्रतिशत सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर खर्च किया जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना इस साल पंचायत चुनाव और अगले साल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर लोकलुभावन बजट प्रावधानों की तैयारी में लगातार समीक्षा कर चुके हैं। सरकार ने जिलों से लेकर शासन के सभी विभागों से विकास कार्यों के साथ-साथ आम जनता की सुविधाओं को मजबूत करने वाले प्रस्ताव मंगाए थे। सूत्रों के अनुसार, बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को सबसे ज्यादा प्राथमिकता मिलने की संभावना है। सड़क, पुल, एक्सप्रेसवे, शहरी विकास, औद्योगिक ढांचे और कनेक्टिविटी से जुड़े कार्यों पर बड़े पैमाने पर निवेश किया जा सकता है। इसके बाद शिक्षा, कृषि और स्वास्थ्य जैसे सामाजिक क्षेत्रों पर भी उल्लेखनीय आवंटन की तैयारी है।
अब प्रस्तावित बजट इससे भी बड़ा होने की उम्मीद है, जिसमें जनकल्याणकारी योजनाओं को और विस्तार दिया जाएगा। बजट में युवाओं के लिए रोजगार सृजन, किसानों की आय बढ़ाने, गरीब और जरूरतमंद वर्ग के लिए संचालित योजनाओं को मजबूती देने पर विशेष ध्यान रहेगा। शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, खाद्य सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाने की तैयारी है, ताकि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इसके साथ ही कानून-व्यवस्था को और सुदृढ़ करने के लिए भी पर्याप्त प्रावधान किए जा सकते हैं। सरकार का लक्ष्य तेज विकास के साथ-साथ वित्तीय संतुलन बनाए रखना भी है।
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