अगर आपको पता चले कि पाकिस्तान के लाहौर में सुन्नत नगर संत नगर मौलाना जफर अली खां चौक लक्ष्मी चौक मुस्तफाबाद चौक धर्मपुरा अल्लका इकबाल जेल रोड इस्लामपुरा, कृष्णनगर, बाबरी मस्जिद रोड जैन रोड गाजियाबाद कुम्हारपुरम जिलानी रोड के नाम से अब जाने जाएंगे। वर्तमान हालात में इससे संबंध खबर पढ़कर पहले तो बड़ा आश्चर्य हुआ और पता चला कि पाक की पंजाब प्रांत के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सीएम मरियम नवाज की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इस फैसले को हरी झंडी दी गई थी। नाम बदलने का यह अभियान लाहौर हैरिटेज रिवाइवल परियोजना का हिस्सा है जिसका उददेश्य लाहौर को विभाजन पूर्व विरासत और पहचान से दोबारा जोड़ना बताया जा रहा है। इसी के साथ एक खबर पढ़ी कि नवाज शरीफ की योजना के तहत मिंटो पार्क में तीन क्रिकेट मैदान व अखाड़े को पुनजीर्वित करना था। एरिया विश्लेषक इसे शरीफ की डेमेज कंटोल पॉलिसी बता रहे हैं क्येांकि तत्कालीन सीएम शहबाज शरीफ ने इन्हें गिरा दिया था। जो भी हो फिलहाल पाक में रहमान गली अब राम गली और बाबरी रोड अब जैन मंदिर रोड के नाम से पहचाने जाने की बात सामने आई है। मुझे लगता है कि डेमेज कंट्रोल नीति के तहत अगर पाक सरकार अन्य मामलों में भी ईमानदारी से प्रयास करे तो वाकई में इस नाम बदलो योजना के अच्छे परिणाम साबित हो सकते हैं। क्येांकि पाठकों को याद होगा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी कुछ साल पहले अचानक पाकिस्तान के पीएम के एक समारोह में पहुंचकर सदभावना का संदेश दे चुके हैं। पाक में हुई नाम बदलने की यह पहल एक अच्छा संदेश है। बस पाक सरकार को अपनी भारत विरोध रणनीति की सोच में बदलाव लाने की आवश्यकता है। मुझे लगता है कि अगर ऐसा होगा तो रोटी बेटी का रिश्ता जो पूर्व में था वो फिर से शुरु हो सकता है और पाक के जो लोग विभाजन से पहले भारत में रहते थे वो अपने जन्मस्थान और पुराने परिचितों से मिलने का मौका पा सकते हैं। इसी प्रकार विभाजन में पाक सेेआए परिवार भी पाकिस्तान में अपने परिजनों से मिल सकते हैं। बस पाक सरकार जिस प्रकार डेमेज कंट्रोल नीति के तहत सड़क और चौराहों के नाम हिंदू नामों पर रख रही है उसी प्रकार अंतरराष्ट्रीय मुददों को भारत के पीएम से आग्रह कर बैठकर सुलझा लें तो भले ही पाक हमसे अलग हो लेकिन भारत सरकार वहां के नागरिकों की कई समस्याओं का समाधान करने में देर नहीं करेगी। फिलहाल कुछ भी कह लो यह खबर रिश्तों की गर्माहट की बहाली में डूबते को तिनका का सहारा के समान है। अगर सोच बदलती है तो इसमें कोई बुराई नहीं है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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