जैसे जैसे नागरिक अपने स्वास्थ्य के प्रति सतर्क होने लगे हैं वैसे वैसे देशभर में खुल रहे जिम की संख्या में निरंतर बढ़ोत्तरी होती जा रही है। क्येांकि कुछ लोग तो पैदल घूम या योगा कर स्वस्थ रहने की कोशिश करते हैं मगर एक बड़ा वर्ग जिम जाकर वजन घटाने और बॉडी बनाने स्वस्थ रहने के लिए मेहनत करता है। परिणामस्वरूप अब गली मोहल्लों में छोटे बड़े जिम धुंआधार खुल रहे हैं। जैसे जैसे इनकी संख्या बढ़ रही है वैसे वैसे इनकी अनियमतिताएं भी खुलकर सामने आ रही हैं। कुछ साल पहले दक्षिण भारत में एक वीआईपी परिवार का आदमी जिम में हार्ट अटैक से मर गया तो दूसरी तरफ छेड़छाड़ की बात तो दूर अब जो जिम ट्रेनर आदि द्वारा दुष्कर्म करने की घटनाएं बढ़ रही है वो काफी चिंताजनक है। बीते दिनों पढ़ा कि जिम जाने वाली महिला के ट्रेनर से संबंध हो गए जिसके बाद में उसने उसकी पुत्री को भी फंसा लिया और लंबे समय तक उससे दुष्कर्म करता रहा। आज खबर पढ़ी कि सहारनपुर के बिहारीगढ़ में नर्सिंग की छात्रा को नशीला पदार्थ पिलाकर जिम ट्रेनर ने दुष्कर्म किया। कहने का आश्य है कि सरकार और पुलिस प्रशासन को स्वास्थ्य के इन आधुनिक केंद्रों की निगरानी और इन्हें नियंत्रित करने के लिए नियमों का बनाया जाना यह समय की मांग हो गई है। क्योंकि पुरुषों से महिलाएं भी कम नहीं है। जिम में जाती हैं। मेरा मानना है कि जो भी जिम खुले हैं उन्हें और जो नए खुलने वाले हैं उनके लिए सरकार को नियम बनाने चाहिए जिससे जिम में सुबह शाम तीन तीन घंटे स्थायी रुप से एक डॉक्टर की व्यवस्था हो। हर जिम में महिला जिम ट्रेनर भी अनिवार्य रुप से रखी जाए। जिम के हर कोने में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और उनके माध्यम से हर गतिविधि पर निगाह रखने के लिए महिला की तैनाती हो। अगर किसी भी जिम में किसी तरह की कोई अनहोनी घटना होती है तो जिम के मालिक और संचालक से पूरी तौर पर पूछताछ और कार्रवाई की जाए जिससे वह अपने यहां के माहौल पर खुद भी नजर रख सके। जहां जिम खुलते हैं उनमें ताजी हवा और आने जाने के दो रास्ते हो जिससे आकस्मिक घटना के होने पर लोग निकलकर बाहर जा सकें और आने वाले ताजी हवा में एसी के माहौल के बजाय ताजी हवा में सांस ले सकें। और जिम ट्रेनर से चरित्र प्रमाण पत्र भी लिया जाए। पसीना निकालते हुए। इसके अलावा कानून के हिसाब से व्यवस्था बनी रहे और नियमों का पालन कराने के लिए किसी प्रशासनिक अधिकारी या क्षेत्र के थानेदार को जिम्मेदारी सौंपी जाए कि वो माह में कम से कम एक बार जरुर उसका निरीक्षण कर सके। इसके बाद भी अगर कोई अनहोनी होती है तो उसके लिए जिम्मेदारों को भी शक के दायरे में रखकर कार्रवाई हो। जिम खोलने के लिए अनिवार्य रुप से लाइसेंस लेना निर्धारित किया जाए और जब छोटे मामले में आवेदनकर्ता की पुलिस जांच कराई जाती है और मजिस्ट्रेट का प्रमाण पत्र लिया जाता है तो उसी प्रकार जिम ट्रेनर की पुलिस जांच कराते हुए किसी मनोवैज्ञानिक से उसकी काउंसिलिंग कराई जाए और फिर ट्रेनर नियुक्त किया जाए तो मुझे लगता है कि इन घटनाओं पर रोक लग सकती है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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