मेरठ 26 मई (प्र)। लंबे समय बाद मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) के 13 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का हस्तांतरण नगर निगम को हो गया है। इसके लिए दोनों विभागों ने समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। एक जून से निगम इनके संचालन की व्यवस्था संभालेगा। इन सभी एसटीपी के संचालन के लिए नए सिरे से ठेका छोड़ा जाएगा। दरअसल, मेडा भी ठेके पर ही एसटीपी का संचालन करता रहा है। पूर्व में दिए गए ठेके की अवधि पूरी हो गई है।
मेडा प्रतिवर्ष 18 से 20 करोड़ रुपये सीवर शुल्क से आय निर्धारित करता था, लेकिन स्टाफ न होने से वसूली नहीं हो पाती थी। अब यह शुल्क निगम वसूलेगा। शर्त ये है कि मेडा तीन साल तक इनके संचालन के लिए निगम को धनराशि देगा। पहले साल पूरी धनराशि दी जाएगी। दूसरे साल निगम द्वारा वसूले गए सीवर कर का 50 प्रतिशत और तीसरे साल 25 प्रतिशत धनराशि मेडा देगा।
अब पूरी क्षमता से चलेंगे प्लांट पास की कालोनियों को लाभ
जिन कालोनियों में एसटीपी हैं उनमें से शताब्दीनगर व लोहियानगर को छोड़ दें बाकी कालोनियां नगर निगम के पास हैं। उनमें सीवर सफाई व एसटीपी को छोड़कर बाकी सभी कार्य नगर निगम करता है। एसटीपी मेडा के पास होने के कारण नगर निगम न उसकी क्षमता बढ़ा सकता था न ही आसपास की कालोनियों को उसमें जोड़ सकता था। अब सभी एसटीपी नगर निगम के हवाले हो गए हैं, इसलिए अब नगर निगम इनकी क्षमता बढ़ा सकेगा। आसपास की कालोनियों को भी इन एसटीपी से जोड़ा जा सकेगा।
एक नजर में जानिए एसटीपी का हाल
क्षमता ( एमएलडी) स्थिति (एमएलडी)
लोहिया नगर 10 5.20
मोदीपुरम तिराहा 05 3.50
पल्लवपुरम – एक 07 6.10
पल्लवपुरम- दो 11 7.40
रक्षापुरम 06 4.40
गंगानगर 10 4.50
सैनिक विहार 06 6.00
श्रद्धापुरी फेस- दो 06 5.80
पांडव नगर 03 2.50
श्रद्धापुरी फेस-एक 06 6.00
वेदव्यासपुरी 15 4.20
स्पोर्ट्स गुड्स 07 2.00
शताब्दीनगर 15 4.00
18 करोड़ है सालाना खर्च
इन 13 एसटीपी के संचालन पर बिजली बिल व रखरखाव समेत विभिन्न कार्यों को मिलाकर प्रति वर्ष 18 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। हालांकि अब नगर निगम अब इनकी क्षमता भी बढ़ाएगा और आसपास की कालोनियों को भी इसमें जोड़ेगा इसलिए अब इसका खर्च और बढ़ेगा।
मेडा उपाध्यक्ष संजय कुमार मीना का कहना है कि मेडा के सभी 13 एसटीपी नगर निगम को हस्तांतरित कर दिए गए हैं। इससे संबंधित एमओयू पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं।

