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    प्रदूषण समाप्ति के उपाय हो जाएं तो 2050 तक 17 लाख मौतों को रोका जा सकता है, छह मिनट में मौत और 34 मिनट में अस्थमा का शिकार हो रहे हैं

    adminBy adminJuly 30, 2026No Comments3 Views
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    रोज ही पढ़ने सुनने को मिलता है कि देश में सामाजिक कार्यकर्ता स्कूली बच्चों पर्यावरणविद प्रदूषण की समाप्ति के लिए अभियान चलाते जागरुकता रैली निकालते हैं। घोषणाएं और दावे सरकार व इनके द्वारा किए जाते हैं। प्रदूषण को रोकने के लिए एनजीटी के साथ ही सरकारी अधिकारी गोष्ठियां करते हैं। लेकिन खबरों से लगता है कि यह सब दिखावा व फोटो छपवाने सरकार को गुमराह करने के साथ लोगों को इसके दुष्परिणाम झेलने के लिए छोड़ दिया जाता है। नई रिपोर्ट के अनुसार आईसी सिटी के शोधकर्ता लिंगझी ने कहा कि भारत में सड़क परिवहन से जुड़े बच्चे हर ३४ मिनट में अस्थमा का शिकार हो रहे हैं। दूसरी ओर समाचार के अनुसार सड़क परिवहन प्रदूषण से हर छह मिनट में एक समयपूर्व मौत हुई है। बताते हैं कि जनस्वास्थ्य पर बड़ा बोझ डाल रहे प्रदूषण के कारण २०२४ में ऐसे मामले सामने आए वैसे तो देशभर में यह समस्या तो है ही लेकिन दिल्ली एनसीआर पर इसका ज्यादा असर हो रहा है। हेल्थ बेनिफिट ऑफ जीरो एमिशन ट्रांसपोर्टस २०५० नामक रिपोर्ट बीते बुधवार को जारी की गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि सही उपायों को लागू करने से अब से २०५० के बीच भारत में १७ लाख समयपूर्व मौतों को रोका जा सकता है। रिपोर्ट जारीकर्ता लिंगझी की बात तो है ही अगर वैसे भ्ीा देखे तो सड़को पर जहरीला धुआ छोड़ते वाहन कई बीमारियों को जन्म देते हैं। मै किसी पर आरोप नहीं लगा रहा लेकिन इस मामले में सेना के वाहनों में सुधार की बड़ी आवश्यकता है क्योंकि बड़ी तादात में यह सड़कों पर धुंआ छोड़ते और नगर निगम के वाहन कूड़ा फैलाते हुए चलते है जिससे उत्पन्न बदबू व्यक्तिा को बुरी हालत में पहुंचा देती है। सरकार और अदालत ने इसे रोकने के लिए नियम बनाए हैं लेकिन जिम्मेदारों ने इसे नहीं निभाया और आम आदमी मौत का शिकार हो रहा है।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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